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OMG ! 12 साल में भिलाई-दुर्ग के तीन नामी कॉलेजों ने सरकार को लगाई 4 करोड़ रुपए की चपत

कल्याण महाविद्यालय, भिलाई महिला विद्यालय और सेठ रतनचंद्र सुराना कॉलेज ने सरकार को करोड़ों रुपए की चपत लगा दी।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Jun 20, 2018

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OMG ! 12 साल में भिलाई-दुर्ग के तीन नामी कॉलेजों ने सरकार को लगाई 4 करोड़ रुपए की चपत

मोहम्मद जावेद @भिलाई. शहर के शैक्षणिक संस्थान कल्याण महाविद्यालय, भिलाई महिला विद्यालय और सेठ रतनचंद्र सुराना कॉलेज ने सरकार को करोड़ों रुपए की चपत लगा दी। उच्च शिक्षा विभाग की वित्त शाखा की आडिट रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है। तीनों कॉलेजों ने सरकारी खजाने में जमा कराने वाली रकम के साथ अमानत में खयानत किया है।

12 साल से सिर्फ शिक्षण शुल्क की आधी
कॉलेजों को प्रति वर्ष होने वाले एडमिशन से इक_ा हुई कुल राशि का आधा हिस्सा सरकारी खजाने में जमा कराना था, लेकिन कॉलेजों ने ऐसा किया नहीं, बल्कि पिछले 12 साल से सिर्फ शिक्षण शुल्क की आधी राशि ही विभाग के सुपुर्द की। इससे सरकार को बड़ा आर्थिक नुकसान पहुंचा है। अब विभाग ने इन तीनों कॉलेजों से अंतर की राशि वसूलने का आदेश जारी कर दिया है। तीनों को 4 करोड़ 17 लाख रुपए वित्त विभाग में जमा कराने को कहा गया है।

हरकत में विभाग मांगी जानकारी
वित्त शाखा ने कॉलेजों से कहा है कि शैक्षणिक सत्र 2006 से 2017 तक प्रवेश के दौरान छात्रों से वसूल की गई कुल शुल्क की राशि का ब्योरा उपलब्ध कराएं। यही नहीं विभाग ने हर एक कॉलेज को वित्तीय वर्ष में कुल राशि के अंतर का विवरण भी भेज दिया है। विभाग ने कॉलेजों को जल्द से जल्द अंतर की राशि जमा करने के आदेश दिए हैं।

कॉलेजों को क्यों जमा करानी थी आधी रकम
कल्याण सहित यह तीनों महाविद्यालय शासकीय अनुदान से संचालित किए जाते हैं। यानी यहां पढ़ाने वाले प्रोफेसरों के मोटे वेतन और भत्ते सरकार वहन करती है। इसी तरह समय-समय पर अन्य जरूरतों पर भी भारी आर्थिक सहायता देकर पूरा किया जाता है। ऐसे में सरकार कुल एकत्र रकम का ५० फीसदी हिस्सा लेती है, ताकि व्यवस्थाएं संचालित हों।

दुर्ग के तीन सहित प्रदेश के 11 कॉलेजों में गड़बड़ी
प्रदेश में ११ अनुदान प्राप्त कॉलेज हैं। इसमें तीन दुर्ग जिले के भिलाई में है। विभाग को इन सभी कॉलेजों में गड़बड़ी मिली है। सभी को अंतर की राशि जमा करने के आदेश दिए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि सबसे अधिक बकाया रकम दुुर्ग जिले के दो अनुदान प्राप्त कॉलेजों पर ही बकाया है।

अब क्या करने की सोच रहे कॉलेज
अनुदान प्राप्त कॉलेजों के प्रबंधन अब इस सिलसिले में उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय से मुलाकात करने वाले हैं। सभी का कहना है कि शुरुआत से ही सिर्फ ट्यूशन फीस की रकम का आधा हिस्सा देने का प्रावधान था, जबकि सरकार ने इस नियम को बदल दिया। कॉलेज सरकार को एकत्र कुल शुल्क का ५० फीसदी देना पड़ता है तो ऐसे में कॉलेज चलाया ही नहीं जा सकेगा।

भले ही सरकार से अनुदान प्राप्त प्रोफेसरों का वेतन आता है, पर इसके अलावा भी कॉलेज की ढेरों जरूरतें होती हैं, जिसे पूरा करना होता है। परिनियम-२८ के तहत शिक्षकों को वेतन देय होता है। अविभाजित मध्यप्रदेश के दौर में सभी अनुदान प्राप्त कॉलेजों को सरकार के खजाने में सिर्फ ट्यूशन फीस की आधी रकम ही जमा कराने का प्रावधान था।

काफी दिनों तक यह सिस्टम चला भी, लेकिन छत्तीसगढ़ बनने के बाद सरकार ने सितंबर २००६ में नया कानून लागू कर दिया। नए नियम के हिसाब से अब कॉलेजों को सिर्फ ट्यूशन फीस ही नहीं बल्कि प्रवेश के बाद एकत्र कुल शुल्क का ५० फीसदी भाग सरकार को दिए जाने का प्रावधान कर दिया गया।

सचिव भिलाई एजुकेशन ट्रस्ट सुरेंद्र गुप्ता ने बताया कि कॉलेज में संचालित कोर्स सिर्फ अनुदानित प्रोफेसरों से नहीं चलते। कॉलेज कई जरूरतें होती हैं। यदि कुल शुल्क का ५० फीसदी देना पड़ता है तो ऐसे में कॉलेज के हाथ पूरी तरह से खाली हो जाएंगे। ऐसे में संचालन कैसे मुमकिन हो पाएगा।

गवर्निंग बॉडी सुराना कॉलेज के अध्यक्ष प्रेमचंद देवांगन ने बताया कि महालेखाकार की ओर से पत्र आया है। इसमें बताई गई राशि दे पाना मुमकिन नहीं है। हम सभी अनुदान प्राप्त कॉलेज जल्द ही आपस में इस विषय पर विचार करेंगे। वैसे हमने शासन को पत्र लिखकर राशि नहीं दे पाने का कारण भी बता दिया है।

प्राचार्य कल्याण महाविद्यालय डॉ. एलआर वर्मा ने बताया कि नियम में हमेशा से ही शिक्षण शुल्क का आधा हिस्सा देने की बात है। कई वर्षों से इस नियम में त्रृटि होने के बारे में कॉलेजों ने बताया है, लेकिन इसे अभी तक नहीं सुधारा जा सका है। अनुदान प्राप्त शिक्षक लगातार रिटायर हो रहे है, ऐसे में उनकी जगह ले रहे शिक्षकों को वेतन कैसे दे पाएंगे।