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सोहारी और खीर खाकर किया खरना, गुरुवार को देंगे अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य

सोहारी(रोटी) और गुड़ से बनी खीर के साथ पीठा खाकर छठ व्रतियों ने बुधवार को खरना की रस्म निभाई।

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Chhath festival

भिलाई. सोहारी(रोटी) और गुड़ से बनी खीर के साथ पीठा खाकर छठ व्रतियों ने बुधवार को खरना की रस्म निभाई। सुबह से निर्जला व्रत रख व्रतधारियों ने आज नमक का भी त्याग किया। प्रसाद ग्रहण करने के बाद उनका 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया। ट्विनसिटी में यूपी-बिहार वासियों के घर आज उत्सव सा माहौल है। रंगबिरंगी रौशनी से नहाए घरों में पूरा परिवार छठी मैया की आराधाना की तैयारी में जुट गया है। कल शाम को डूबते सूरज को अघ्र्य देने फल, सब्जियां, ठेकुआ सहित कई पारंपरिक व्यंजनों की तैयारी शुरू हो चुकी है। बच्चों से लेकर बड़ों को कल दोपहर का इंतजार है कि वे जल्दी से घाट पहुंचे और वहां जाकर इस पर्व को पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएं।

लगाया सिंदूर और बांटा प्रसाद

छठ के एक दिन पहले यानी खरना के दौरान व्रत करने वाले परिवार ने सभी दोस्तों, रिश्तेदारों को खरना में शामिल होने आमंत्रित किया। इस दौरान घर में आने वाली सुहागिनों को सिंदूर लगाकर प्रसाद बांटा। अवधपुरी निवासी पूनम प्रियदर्शी ने बताया कि वह पहली बार छठी मैया का व्रत करने जा रही है, इसलिए उसकी इस खुशी में शामिल होने पड़ोसी, रिश्तेदारों के साथ सहेलियां भी उनके घर पहुंची। पूनम ने बताया कि खरना के दिन के प्रसाद का काफी महत्व है। गन्ने के रस या गुड़ से बनी खीर को चूल्हे में आम की लकडिय़ों को जलाकर बनाया जाता है। साथ ही घी लगी रोटियां जिले सोहारी कहते हैं प्रसाद के रूप में दी जाती है। अपनी सहेली के घर प्रसाद ग्रहण करने पहुंची संगीता सिजारिया, रश्मि घाटे, सुनीता निखाड़े, मऊ राय, चैती पाल सहित कई महिलाओं ने बताया कि उनके घरों में यह व्रत नहीं होता,लेकिन वे हर वर्ष छठ के दिन तालाब जाकर छठी मैया की इस पूजा को जरूर देखते हैं। इस वर्ष पूनम के व्रत में साथ देने वे गुरुवार को सेक्टर 7 तालाब भी जाएंगी।

गुरुवार को बनेगा छठ का प्रसाद
छठी मैया के लिए सजाए जाने वाले सूप(सूपा) में मौसमी फलों के साथ मूली, अदरक, सब्जियां सहित ठेकुआ, खजूर आदि भी अर्पण किया जाता है। जिसमें ठेकुआ का प्रसाद सुबह बनाया जाएगा। इसके साथ ही छठ व्रती केले की पूरी डंगाल, नारियल, संतरा, मुंसबी, जैसे कई फलों से भी अघ्र्य देंगे। वहीं कलश में कच्चा दूध और पानी भी सूर्यदेव को अर्पण किया जाएगा। शुक्रवार की सुबह भी यही प्रक्रिया अपनाकर उगते सूर्य को अघ्र्य देंगे।

हर साल ही हमारी छठ होती है खास
उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय के घर छठ पर्व कई वर्षो से मनाया जा रहा है। पहले उनकी माताजी इस उपवास को करती थी और उनके साथ-साथ उनकी पत्नी कृष्णा पांडेय भी 30 साल से छठी मैया का कठिन व्रत कर रही हैं। कृष्णा पांडेय बताती हैं कि जब से उन्होंने छठ व्रत की शुरुआत की। छठी मैया ने उनकी सभी मनोकामना पूरी की। वे बताती हैं कि इस कठिन व्रत को करने की हिम्मत भी छठी माता ही उन्हें देती है। इन दिनों वे शुगर की मरीज है,लेकिन माता के आशीर्वाद से इस व्रत को आसानी से पूरा कर रही है। वे बताती हैं कि इन तीन दिनों तक स्वच्छता और शुद्धता का काफी ख्याल रखना होता है। आज के दिन सिर पर कंघी तक नहीं की जाती और छठ वाले दिन व्रती चप्पल तक नहीं पहन सकते। इस व्रत के लिए प्रसाद की तैयारी करने से लेकर शाम और सुबह घाट जाने तक साथ देने उनकी बेटियां मधु और मृदुला दोनों ही ससुराल से घर आई है। साथ ही उनकी भाभियां अंजली और नीलम तिवारी भी उनकी मदद कर रही हैं। घाट पर बेटा मनीष और उनके पति यानी मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय भी उनके साथ होंगे।

सज-धज कर तालाब तैयार
शहर के प्रमुख तालाब सज-धज कर तैयार है। सेक्टर 2 तालाब, सेक्टर 7, नेहरूनगर, सूर्यकुंड सहित ट्विनसिटी में करीब 24 तालाबों को छठ के लिए तैयार किया गया है। सेक्टर 2 तालाब में घाट पर आने वाले लोगों के लिए भजन का भी कार्यक्रम रखा गया है। जिसमें यूपी- बिहार के छठ गीत सुनाई देंगे।