
पीडि़त की विधायक पुत्र से बातचीत की रिकार्डिंग
अतुल श्रीवास्तव@राजनांदगांव. दिवंगत प्रधान पाठक की विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने का लालच देकर उसके ससुर से ढाई लाख रुपए की ठगी करने वाले विधायक पुत्र ने बेहद शातिर अंदाज में पीडि़त को फांसने की कोशिश की थी। रुपए लेने के बाद नौकरी न लगा पाने के बाद भी वो पीडि़त को आश्वासन देता रहा और सहानुभूति पाने यहां तक कहता रहा कि काम नहीं होने के कारण वो खुद शर्मिंदा है। वो रुपए लेने की बात तो स्वीकारता रहा और काम की गारंटी देते हुए काम न होने पर रूपए लौटाने की बात भी कहता लेकिन वह लगातार पीडि़त को भटकाता भी रहा।
दरअसल, पूरा मामला ठगी का है। बालोद जिले के गिधवा निवासी नेतराम देवांगन की शिकायत पर बसंतपुर पुलिस ने विधायक पुत्र प्रद्युमन नेताम और शिक्षा विभाग के अफसर एसके पांडे के खिलाफ 18 अगस्त को धारा ४२० के तहत मामला दर्ज किया है। हालांकि पुलिस अब तक आरोपियों तक पहुंच नहीं पाई है। इस बीच पत्रिका के पास वह आडियो क्लिप पहुंचा है, जिसके आधार पर पुलिस ने अपराध दर्ज किया है। इस आडियो रिकार्डिंग के संबंध में प्रार्थी का कहना है कि यह उसके और विधायक पुत्र प्रद्युमन के बीच मोबाइल में हुए संवाद की रिकार्डिंग है। प्रार्थी देवांगन के अनुसार उनकी बहू रेणुका देवांगन ेेके हेडमास्टर पिता रोहित देवांगन की २०१३ में मृत्यु हो गई थी। उनके स्थान पर बहू को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने का प्रयास किया तो इसके लिए शिक्षा विभाग के अफसर पांडे और मोहला मानपुर विधायक तेजकुंवर नेताम के पुत्र प्रद्युमन ने ढाई लाख रूपए की मांग की। उन्होंने बताया कि रूपए देने के बाद भी जब नियुक्ति की सूची में उनकी बहू का नाम नहीं आया तब उनको खुद के ठगे जाने का अहसास हुआ। अपनी रकम वापस मांगने पर दोनों उनसे कन्नी काटने लगे और मुलाकात होने पर उनसे अभद्रता भी करने लगे।
देवांगन ने बताया कि कई कोशिशों के बाद एक दिन प्रद्युमन से उनकी बात हुई। इस बातचीत की रिकार्डिंग के आधार पर उन्होंने पुलिस की शरण ली और मामला दर्ज हुआ। इस बातचीत के अलावा एक और रिकार्डिंग भी है जिसमें प्रार्थी की बातचीत किसी महिला से हो रही है। प्रार्थी इस महिला को दीदी के संबोधन के साथ बात कर रहे हैं और वे बार बार प्रद्युमन से बात कराने का आग्रह भी कर रहे हैं। यह महिला कौन है इस संबंध में प्रार्थी का कहना है कि प्रद्युमन ने ही उनसे इनकी बात कराते हुए कहा था कि ये शिक्षा विभाग की बड़ी अफसर हंै और ये नियुक्ति में मदद कर रही हैं।
पीडि़त - हलो
प्रद्युमन -हलो
पीडि़त - ले तें न बता ना ग
प्रद्युमन - अच्छा, आप उठाए हो क्या
पीडि़त - हां
प्रद्युमन - सामने ही बात हुई है। ये लोग क्या है कि बिल्कुल खाने पीने के लिए फुर्सत नहीं है भैया इनको। दीदी की गुडिय़ा का तबियत खराब है करके यहां आई है। हमलोग उत्ते दूर से वापस आए हैं। और खोजे जा रहे हैं। मैडम ने बोल दिया घर गई हैं ऐसा करके। छुट्टी लेकर घर आ गई हैं। तबियत खराब है करके। वो हमारे क्षेत्र के ही हैं। वहीं पर हैं। उनसे पूछा मैं तो बताए कि नई गुडिय़ा की तबियत ज्यादा ही खराब है और कल से ही खराब है। कल क्या है कि कल आतीं तो मम्मी पापा लोग भी गए थे। पहले से ही बात हो गई थी।
पीडि़त - हां
प्रद्युमन - तो इसलिए वो लोग रूके हुए थे। इसके बाद आई है वो।
पीडि़त - हां
प्रद्युमन - मम्मी ने खुद पूछा होगा कि नहीं होगा? क्योंकि सब परेशान हैं इस केस के चक्कर में। तो दीदी ने बात भी कराया बोले नहीं भई पूरा ओके है काम। जो काम बिगड़ा था, उसको बनाकर हम लोग यहां से भेज रहे हंै। बस इतना है कि आपको आदेश भर निकालना बाकी है। आदेश भी ऐसा है कि सारा चीज ओके है। अब आदेश मतलब एक लाईन का तो है नहीं जी। है ना भई।
पीडि़त - हां
प्रद्युमन - तो उसको निकालकर वहां भेजना भर है। और कुछ नहीं करना है। है ना भाई।
पीडि़त - हां
प्रद्युमन -जो भरद्वाज को भेजा है ना, डीओ को, उसको बताकर के भेजा जा रहा है कि आएगा उसको तुरंत करना है, ऐसा करके।
पीडि़त - अरे ओ तोला, भरद्वाज रहे के कोनो द्वाज रहे, में पांव पड़ लुहूं अधिकारी के, और पड़ सकथों, लेकिन मोर पैसा के का होईस, तोला ढाई लाख रूपया दें हों तेखर, ये पूछत हों जी।
प्रद्युमन - तो वो तो वापस करहूं कहे हों का जी आपला। अगर मान लो नहीं होही त आपला वापस करहंू। अब जैसा आप बोलो।
पीडि़त - नहीं।
प्रद्युमन -में त पहले से बोल चुके
पीडि़त - नहीं। ते तो तोला पूछत हों जी कि अऊ पैसा के जरूरत है का कईके।
प्रद्युमन -नई नई नई। कहीं कोई जरूरत नहीं है। उल्टा तो हमला का बताबे, हमला खुद शर्मिंदा लगत हे। ऊपर से आपको मैं तकलीफ में देख रहा हूं तो मुझे खुद तकलीफ हो रही है। भई इतना परेशान जबरदस्ती का हुए भैया जो काम पूरा...
पीडि़त - अरे टूरा भग गे तोर नांव ले के आज
प्रद्युमन - का चीज
पीडि़त - टूरा भग गे
प्रद्युमन - भग गे मतलब
पीडि़त - आज भर मतलब ए कर कहेंव करके गा, तिहीं जान मर अब ऐईसे करके
प्रद्युमन - अच्छा। ऐसा नई है भैया जब भरोसा करे हो ना। दीदी के साथ में भी आपला बात करे...
पीडि़त - त तोर ऊपर भरोसा करेंव त मोर बर फंसे के काम होत हे। अऊ त कहत हो ढाई लाख दे हों...
प्रद्युमन - वो भी सब सुधर जाएगा। सुनो ना, जब सुधर जाएगा ना तो वो ही लोग आपको अच्छा बोलेंगे।
पीडि़त - त तें बोल ना पांडे ला देंव हों, त वोखर से तें जान कहिके
प्रद्युमन - त ले तो में हो न बीच में। आपला का बोलेंव। अर्जुन भैया ह त हर बार भग जाते हैं। मैं जो लिया हंू आपसे, जो मेरी बात..
पीडि़त - नहीं जी। जो पांडे बोलिस ना, अईसे अधिकारी बर मोर दिमागे खराब हो गे। पईसा खवईया अधिकारी झूठ मूठ बोल के
प्रद्युमन - हूं हूं हूं हूं
पीडि़त - अऊ बोलत हे तो कुछ के कुछ बोलते हे, जानो मानो में ओखर चरवाहा हो तईसे। नौकरी करत हे तेन गुलाम रहे, में नई करत हों।
प्रद्युमन - हूं हूं हूं हूं
पीडि़त - पईसा देके गुलामी नई करों में
प्रद्युमन - हूं। सही बात है ना।
पीडि़त - पईसा देके
प्रद्युमन - हूं। अऊ कौन सुनही बता ना
पीडि़त - पईसा देके
प्रद्युमन - हूं। दिए हैं तो कौन सुनेगा बताओ।
पीडि़त - आंय
प्रद्युमन - कोई दिया है तो सुनेगा क्यों, बोल रहा हंू जी।
पीडि़त - अ त सुनहूं घलो जी लेकिन कुछ के कुछ बोलथे, देख ना पैसा ले बर त झूठ मूठ के अधिकारी बन गे
प्रद्युमन - हूं हूं हूं हूं
पीडि़त - पईसा ल त कईसे
प्रद्युमन - वही चीज ल न तभी तो डरके... आप चिल्लाए न त डरके मारे मम्मी को फोन लगाया...
पीडि़त - नहीं त पईसा...
प्रद्युमन - तो मम्मी...
पीडि़त - पईसा ला तोला दे हों, तें दे के नई देस तेहूं बता
प्रद्युमन - का चीज...
पीडि़त - पईसा ला तोला में नई दे हों गा
प्रद्युमन - हां हां हां
पीडि़त - अऊ ते पांडे ला देस के नई देस, तेंही जानबे...
प्रद्युमन - पांडे चाचा ला में दे रहेंव ना जी
पीडि़त - हां त उही बात ल त पूछत हवं जी
प्रद्युमन - हां
पीडि़त - पईसा ल जब खाए हे तब में मैं जानता नई हूं प्रद्युमन पैसा देगा करके बात करता है
प्रद्युमन - वो क्या है ना, आफिस में आप ऐसा बोले थे करके उन्होंने मेरे को बोला... ठीक है
पीडि़त - हां
प्रद्युमन - है ना, हां और उसके बाद में ना कि आफिस में मैं इसलिए बोला बोले कि आफिस में इतने सारे लोग थे, मैं क्या बोलता वहां पे। और सब लोग चिल्लाते मेरे को। बेईज्जती होती फालतू में।
पीडि़त - त स्वयं नई बतातीस नई गा पैईसा ला दे हस तो चुप्पे रह करके।
प्रद्युमन - हां। तो वो का है ना भईया, ओखरे सेती वोला अईहे रहिस नाराजगी...
पीडि़त - तोर घर में त दीस है पईसा, इसको दे दो यार वापस करो कहिके, वोतकी टाइम मोला बोलना रहिस हे... के आप गलत बोलते हो यार कहिके
प्रद्युमन - हां
पीडि़त - तोला खुद कहता पईसा इसका दे दो कहिके
प्रद्युमन - क्या चीज
पीडि़त - अरे गे नई रिहिस गा इसका पइसा दे दो कहिके नई कहात रहिस
प्रद्युमन - हां हां हां हां
पीडि़त - त ओतकी जान नई कहतिस, गलत बात बोलते हो यार, अईसे कहिके
प्रद्युमन - हूं हूं हूं हूं
पीडि़त - अ वो बात ल...
प्रद्युमन - (बात काटते हुए) अब सब बोल रहे हैं ना आपका काम बनाना है ना जी कैसे भी करके...
पीडि़त - अरे मोर त काम...
प्रद्युमन - सुनो ना, अभी अब मेरी जवाबदारी है, आप आप क्या बोलना, क्या करना चाहते हैं वो बताओ, तो मैं इस हिसाब से...
पीडि़त - अरे, करना कुछु नई चाहत हों, फेर ऐसे झु_ा अधिकारी ला मत राख, पईसा वसूल करना....
प्रद्युमन - सुनो ना भईया... पुराना बात ला मत देखो... अब जो चीज वापस चले गे वो वापस नई आए पुराना चीज हा, नए चीज में यही है कि आपके काम हा लगभग बन गे हे इहां..
पीडि़त - नहीं सुन ना गा...
प्रद्युमन - आपके और मोर जो संबंध है वो जीवन भर बने रहे..
पीडि़त - मोला नौकरी के महत्व नई हे जितना मोला पांडे पईसा ले के मोर परिवार ला बरबाद कर दीस
प्रद्युमन - हूं... हां न त ओखर बर...
पीडि़त - त ओखरो बरबाद करहूं न नई बनही
प्रद्युमन - हं... आप निश्चिंत रहो..., ये डहार ले भईया हमन पूरा ताकत लगा दे हन, बताओ... अईसे नई हे के.. में... हमन आखिर तक करत हन लड़ाई, जब तक पूरा कम्पलिट नहीं होही...
पीडि़त - हं... त चल ठीक हे अब... ये दो दिन होही त करबे
प्रद्युमन - हौ हौ हौ
पीडि़त - लेकिन मोर ढाई लाख रूपए के तें ख्याल कर और पांडे से मोला मिलवा...
प्रद्युमन - हो जाही में बोलत हों ना
पीडि़त - हां चल ठीक है
प्रद्युमन - हौ हौ
(कुल ५ मिनट ५ सेकंड की बातचीत)
पूरी रिकार्डिंग पुलिस जांच के दायरे में है और पत्रिका इसकी प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published on:
30 Aug 2017 03:02 pm
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