
अलर्ट रहे, वरना कानूनी पचड़े में फंसने के लिए तैयार (Photo- Patrika)
Fraud News: म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्र से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन लोगों के खाता से लेनदेन हुआ है। इसलिए पुलिस ने इनके गिरफ्तार किया है, लेकिन खाता का इस्तेमाल कर लाखों रुपए की ठगी करने वालों में किसी को भी अब तक नहीं पकड़ा है। पुलिस ने आरोपी प्रशांत विश्वकर्मा, मोन्टू कुमार, रफीक खान, समीर वर्मा, विपिन शुक्ला और मोहम्मद कलाम को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर उन्हें जेल भेज दिया।
एएसपी सुखनंदन राठौर और पुलिस प्रवक्ता एएसपी पद्मश्री तवर ने पत्रवार्ता में इसका खुलासा किया। उन्होंने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि उत्कर्ष बैंक के दो खातों से संदिग्ध लेनदेन हो रहे हैं। इन खातों के धारक प्रशांत विश्वकर्मा एवं मोन्टू कुमार से पूछताछ में पता चला कि उन्होंने पैसे लेकर अपने नाम से खाते खोलकर किराए पर दूसरों को दिए हैं। जांच में इन खातों से 29 हजार 36 रुपए का सायबर फ्रॉड की रकम का लेनदेन होना पाया गया, जिसके आधार पर थाना सुपेला से कार्रवाई कर दोनों को गिरफ्तार किया गया।
एएसपी ने बताया कि एक अन्य मामले में पंजाब नेशनल बैंक के खाते से गुजरात और महाराष्ट्र के लोगों से ठगी कर 50 हजार रुपए का लेनदेन पाया गया। खाता धारक रफीक खान ने भी इसी तरह खाता किराया पर देने की बात स्वीकार की। जिस पर थाना पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया।
एएसपी ने बताया कि बैंक ऑफ इंडिया के दो खातों से अन्य राज्यों के लोगों के साथ करीब 3 लाख रुपए की ठगी की गई थी। खाताधारक समीर वर्मा और विपिन शुक्ला ने पूछताछ में बताया कि उन्होंने खाते मोहम्मद कलाम को पैसे लेकर चलाने के लिए दिए थे। मोहम्मद कलाम ने भी यह स्वीकार किया कि उसने उक्त खातों को आगे किसी अन्य व्यक्ति को पैसे लेकर दे दिया था। मामले में थाना भिलाई नगर ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने बताया कि लालच में लोग बैंक खातों को किराए पर दे रहे हैं। उन्हें यह पता नहीं है कि वे कितना गंभीर अपराध कर रहे हैं। लोगों से अपील है कि अपने बैंक खाते, डेबिट कार्ड या आधार की जानकारी किसी को भी पैसे लेकर न दें। किराए पर देना ही अपराध है। क्योंकि यह सायबर अपराध को बढ़ावा देता है।
Fraud News: बैंकों में म्यूल अकाउंट तेजी से खुल रहे हैं। इन खातों में लगातार हो रहे ट्रांजेक्शन को लेकर बैंक प्रबंधन भी अलर्ट नहीं है। साइबर फ्रॉड करने वाले आरोपी इन खातों को किराए में लेकर अवैध रकम का ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते हैं। बैंक प्रबंधन का कोई इन पर लगाम नहीं है। उनका काम सिर्फ नए खाते को खोलने तक सीमित है। इनमें हो रहे ट्रांजेक्शन से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
Updated on:
26 May 2025 02:39 pm
Published on:
26 May 2025 02:38 pm

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