ट्विनसिटी में नए व्यवसाय को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने के लिए स्थापित डीआईसी (जिला उद्योग केंद्र) नए उद्यमी की डेयरी और खटाल संचालकों को विकसित कर रहा है। दरअसल विभाग के पास खुद की जमीन का लेखाजोखा नहीं होने से खाली जमीन और ग्रीन लैंड पर लगातार कब्जा होता जा रहा है।
नीरज शर्मा/भिलाई. ट्विनसिटी में नए व्यवसाय को व्यवस्थित तरीके से विकसित करने के लिए स्थापित डीआईसी (जिला उद्योग केंद्र) नए उद्यमी की डेयरी और खटाल संचालकों को विकसित कर रहा है। दरअसल विभाग के पास खुद की जमीन का लेखाजोखा नहीं होने से खाली जमीन और ग्रीन लैंड पर लगातार कब्जा होता जा रहा है। पिछले 10 सालों में स्थिति ऐसी बन गई है कि लाइट इंडस्ट्री एरिया में कई जगहों पर लाइन खटालें दिखाई देती हैं। जबकि हैवी इंडस्ट्री की खाली जमीन पर धड़ल्ले से कच्चे और पक्के मकान बन रहे हैं।
विभाग से जमीन का रिकार्ड ही गायब हो गया
जिले में भिलाई इंस्पात संयंत्र की स्थापना के बाद से उसके आश्रित उद्योग भी तेजी से विकसित होने लगे। इसकी वजह से नए उद्यमियों को विकसित करने के लिए भिलाई में लाइट और हैवी इंडस्ट्री के रूप में जमीन उपलब्ध कराई गई। साथ ही उद्योगों से उत्सर्जित रासायनिक पदार्थों से पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रीन लैंड स्थापित करने जमीन छोड़ी गई। इसके बाद विभाग से जमीन का रिकार्ड ही गायब हो गया। जानकारी होने पर किसी भी अधिकारी ने सीमांकन के माध्यम से रिकार्ड तैयार करने की जेहमत नहीं उठाई। इसी वजह से छावनी व हथखोज की ग्रीन लैंड पर हरे भरे पेड़-पौधे विकसित होना तो दूर पूरा एरिया अवैध कब्जे की भेंट चढ़ गया।
ग्रीन लैंड पर बैठी आधी से ज्यादा आबादी बन गए मालिक
भिलाई के नंदिनी रोड व जवाहर नगर से लेकर भिलाई चरोदा निगम के अकलोरडीह तक जिला उद्योग केंद्र की जमीन है। इस बीच लाइट इंडस्ट्री और हैवी इंडस्ट्री के रूप में करीब 450 छोटी-बड़ी कंपनियां हैं। इन्हें जमीन आवंटित करने के बाद डीआईसी ने जमीन का लेखा-जोखा रखना छोड़ दिया। इसकी वजह से पहले छावनी चौक से हथखोज तक कब्जे हुए। इसके बाद एसीसी से लाइट इंडस्ट्री जाने वाले मार्ग समेत सभी जगहों पर कब्जा हो गया। फिर नेताओं की महत्वकांक्षाओं को पूरा करने के लिए मददगार बनकर कब्जेधारी से पट्टेधारी बन गए। डीआईसी के अफसरों ने भी कभी आपत्ति नहीं की।
कब्जे को मौन सहमति दे रहे डीआईसी के अधिकारी
जिला उद्योग केंद्र की जमीन पर कब्जे को लेकर भाजपा के पूर्व जिला मंत्री राम उपकार तिवारी ने कई दफा प्रशासन को पत्र लिखकर चेताया था। इसके बाद भी प्रशासन की ओर कोई कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने जिला उद्योग केंद्र में आरटीआई के माध्यम से जवाब मांगा कि उनकी कितनी जमीन पर कब्जा है। विभाग ने गैरजिम्मेदाराना जवाब देते हुए लिखित उत्तर दिया कि औद्योगिक क्षेत्र भिलाई में कितनी जमीन पर अवैध कब्जा है, इसकी विभाग को जानकारी नहीं है।
अब इंजीनियरिंग पार्क तक हो रहे कब्जा
सालभर पहले प्रशासन को जगाने के लिए आरटीआई के माध्यम से सवाल किया गया। उस दौरान तत्कालीन अधिकारियों ने जमीन सीमांकन का दावा भी किया। लेकिन बाद में कोई कदम उठाया। नजीता हथखोज से इंजीनियरिंग पार्क तक जाने वाले मार्ग पर टीन, सीमेंट, कबेलु और पक्का निर्माण करके मकान खड़े किए जा रहे हैं।
पांच साल पहले अधूरी कार्रवाई की खानापूर्ति
वर्ष 2018 में बड़े कब्जे को चिन्हित कर जिला प्रशासन के माध्यम से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई। लेकिन बाद में जिला प्रशासन और डीआईसी बैकफुट पर आ गया और कार्रवाई अधर में लटक गई। इसके बाद से रिकॉर्ड न होने का शिगूफा छोड़ा जा रहा है।
उचित कदम उठाया जाएगा
दुर्ग कलेक्टर पुष्पेंद्र मीणा ने कहा कि जिला उद्योग केंद्र से प्रकरण की जानकारी मंगवाता हूं। साथ ही इस संबंध में उचित कदम उठाया जाएगा।