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Video: दुर्ग संभाग की पहली गेड़ी बॉल टीम, गृह मंत्री के गृहग्राम में इंजीनियरिंग पास युवाओं का कमाल, पारंपरिक नृत्य को ढाला खेल में

गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के गृहग्राम पाऊवारा में दुर्ग संभाग की पहली गेड़ी बॉल टीम तैयार हुई है। छत्तीसगढ़ी परंपराओं और धरोहर से सजे इस खेल के खिलाडिय़ों को लगभग एक साल के कड़े प्रशिक्षण के बाद मैदान में उतारा गया है। (Gedi Ball sports in chhattisgarh)

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 28, 2020

Video: दुर्ग संभाग की पहली गेड़ी बॉल टीम, गृह मंत्री के गृहग्राम में इंजीनियरिंग पास युवाओं का कमाल, पारंपरिक नृत्य को ढाला खेल में

Video: दुर्ग संभाग की पहली गेड़ी बॉल टीम, गृह मंत्री के गृहग्राम में इंजीनियरिंग पास युवाओं का कमाल, पारंपरिक नृत्य को ढाला खेल में

दाक्षी साहू@ भिलाई. छत्तीसगढ़ का विश्व प्रसिद्ध गेड़ी नृत्य किसी पहचान का मोहताज नहीं है। लोकनृत्य के साथ अब इसमें खेल की अनोखी झलक ने लोगों को गेड़ी बॉल का दीवाना बना दिया है। दुर्ग जिले में गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के गृहग्राम पाऊवारा में दुर्ग संभाग की पहली गेड़ी बॉल टीम तैयार हुई है। छत्तीसगढ़ी परंपराओं और धरोहर से सजे इस खेल के खिलाडिय़ों को लगभग एक साल के कड़े प्रशिक्षण के बाद मैदान में उतारा गया है। असंभव से लगने वाले इस खेल को संभव कर दिखाया है इंजीनियरिंग पास चार युवकों की टीम ने। जिन्होंने कोरोनाकाल में सरकारी स्कूल के गेड़ी बॉल टीम को जिला स्तर पर कड़े प्रशिक्षण के बाद स्टेट लेवल बना दिया है।

चुस्ती, फूर्ति के साथ गेड़ी पर बैलेंस करने के लिए खिलाडिय़ों को रोजाना दो घंटे गांव के पाऊवारा स्कूल मैदान में प्रैक्टिश करवाते हैं। फुटबॉल की तरह नियमों से बंधे इस खेल में दो टीमें खुले मैदान में जब गेड़ी पर चढ़कर बॉल को गोल पोस्ट तक पहुंचाने की कोशिश करती हैं तो लोग दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर हो जाते हैं। अपनी नई सोच से गेड़ी बॉल खेल को मैदान पर उतराने वाले टीम के मुख्य प्रशिक्षक सुमन लाल साहू कहते हैं कि इंजीनियरिंग के साथ खेलों में भी रूचि थी। इसलिए पढ़ाई पूरी होने के बाद दूसरे शहरों में नौकरी की बजाय गांव में एक छोटी सी स्पोट्र्स एकेडमी खोलकर गांव के गरीब बच्चों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। धीरे-धीरे इस खेल में बच्चों की भी रूचि बढ़ते जा रही है।

आधे-आधे घंटे के होते हैं दो हाफ
गेड़ी बॉल खेल में आधे-आधे घंटे दो हाफ होते हैं। पाऊवार मीडिल स्कूल गेड़ी बॉल के टीम के कैप्टन आठवीं के छात्र गौरव कुमार साहू ने बताया कि एक टीम में 9 खिलाड़ी और दो प्लेयर एक्सट्रा होते हैं। अब तक उनकी टीम लगभग दस प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी है। सभी टूर्नामेंट में जीत का परचम लहराया है। छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा गोल करने का रेकॉर्ड भी उनके ही टीम के नाम है। टीम में फिलहाल 6 वीं से लेकर 8 वीं कक्षा में पढऩे में बच्चे शामिल हैं।

इन युवाओं की टीम ने असंभव को किया संभव
गेड़ी बॉल खेल को वैसे तो राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की स्कूल गेम्स में शामिल किया है। दो साल बाद भी प्रदेश के महज इक्का-दुक्का स्कूलों में ही गेड़ी बॉल टीम तैयार हो पाई है। ऐसे में पाऊवारा गांव में इंजीनियरिंग पास 27 वर्षीय सुमन लाल साहू, 27 वर्षीय संदीप हिरवानी, घनेंद्र साहू और सोनू साहू की टीम मिलकर गांव के बच्चों को गेड़ी बॉल खेल में पारंगत कर दिया है। प्रशिक्षक सोनू ने बताया कि बीएसपी स्पोट्र्स डिपार्टमेंट के तजाउद्दीन सर ने गेड़ी बॉल से पहली बार रूबरू करवाया था। तब इस खेल का न नियम पता था न ही कोई प्रतियोगिता हुई थी। स्कूल के शिक्षकों के माध्यम से खेल की बारीकियों को सीखा और इसे बच्चों को सिखाना शुरू किया।

दस बच्चों से हुई शुरूआत आज 150 बच्चे
पुरई गांव के रहने वाले इंजीनियर सुमन ने बताया कि जब उन्होंने पाऊवारा में जयहिंद आजाद स्पोट्र्स क्लब खोला तो उनके यहां केवल 20 बच्चे सीखने आते थे। धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़कर 150 हो गई। गांव के सरपंच, पूर्व सरपंच, जनपद सदस्य, समाजसेवी हर्ष साहू और शाला के प्राचार्य के सहयोग से रोजाना 150 बच्चों को खो-खो, कबड्डी, गेड़ी बॉल, एथलेटिक्स और बाकी खेल विधाओं में तराशा जा रहा है। ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण इन बच्चों से किसी तरह का फीस भी नहीं लिया जाता।

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