बच्चों को खेलना चाहिए,
भिलाई. पावर हाउस में रहने वाले एस अमन (15 साल) सरकारी स्कूल में 10 वीं के छात्र हैं। दिन में वे करीब 7 घंटे बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लेने में दे रहे हैं। कम उम्र में ही अमन ने बड़ा टारगेट सामने रखा है। वे इस खेल के माध्यम से अपने परिवार को नई पहचान देना चाहते हैं।
मोबाइल की जगह हाथ में ग्लव्स
आज के वक्त में जब छोटे-छोटे बच्चों के हाथ में मोबाइल है। वे घरों गेम खेलने में मशगूल हैं, तब अमन के पास मोबाइल ही नहीं है। पिता निजी कंपनी में काम करते हैं। जिसकी वजह से अमन ने ऐसे शौक नहीं पाला। जिससे घर वालों से इस तरह की जिद करना पड़े।
मामा से हैं प्रभावित
अमन बताते हैं कि उनके मामा दीपक बॉक्सर हैं। वे गांव में रहते हैं। उनसे प्रभावित होकर इस खेल की ओर रुझान बढ़ा। अब इसके अलावा दूसरे खेल में रुचि नहीं है। टारगेट है कि इसका बड़ा खिलाड़ी बन सकूं। इस वजह कोशिश कर रहा हूं।
बिलासपुर में मिला गोल्ड मेडल
उन्होंने बताया कि 5 साल से इसके लिए प्रेक्टिस कर रहा हूं। सुबह 6 से 8 बजे तक प्रेक्टिस करता है। इसके बाद शाम को 4 से 8 बजे तक इस खेल में पसीना बहा रहा है। राज्य स्तर में गोल्ड तब हांसिल कर लिया था। जब उम्र सिर्फ 12 साल की थी। बीएसपी के टाउनशिप में केके दस्माना से प्रशिक्षण ले रहा है। वे ऐसे कोच हैं जो बच्चों के लगन को देखकर ही उनके पीछे मेहनत करते हैं।
बच्चों को खेलना चाहिए
अमन का कहना है कि हर बच्चे को अपनी शौक के मुताबिक कोई न कोई खेल जरूर खेलना चाहिए। इससे वह शारीरिक तौर पर स्वस्थ्य रहता है और उसका समय के साथ शारीरिक विकास होता है।