
इस दिवाली तू जश्न बन किसी की जिंदगी का, कॉलेज के प्रोफेसर अपनी तनख्वाह से कर रहे गरीब छात्रों का जीवन रौशन, कैसे यहां जरूर पढ़ें
दाक्षी साहू @भिलाई. सपने रे...सपने मेरे..सच हो जाना ना रे...सपने मेरे। शासकीय दानवीर तुलाराम कॉलेज उतई की दहलीज पर कदम रखते ही हर छात्र ये गाना एक बार जरूर गुनगुनाता है। गाने की लाइन की तरह सपनों को पंख देने वाले एक दो नहीं पूरे 15 लोगों की टीम काम कर रही। जी हां ये वो प्रोफेसर हैं जो कभी तंगहाली में रहकर आज सफलता के इस मुकाम तक पहुंचे और अपने संघर्ष से सबक लेकर उड़ान नाम का एक ऐसा उजला दीया बनाया, जिसकी रोशनी से हर गरीब छात्र भविष्य के सपने बुनने लगा है।
उम्मीद का जलाया उजला दीया
कॉलेज के ये प्रोफेसर हर महीने अपनी तनख्वाह से पांच-पांच सौ रुपए उड़ान फंड में जमा करते हैं। उड़ान समिति बनाकर निर्धन छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराते हैं। पिछले एक साल से यह क्रम चलता आ रहा है। शिक्षादान के अलावा अपनी कमाई का एक अंश जरूरतमंद छात्रों के लिए दान करके इन्होंने पैसों की कमी के कारण टूटते सैकड़ों सपनों के लिए उम्मीद का एक उजला दीया जलाया है। जो इस दिवाली हमारे समाज में खुशियों के हजार रंग भर रहा है।
सामाजिक सरोकार के तहत हुई उड़ान की शुरूआत
कॉलेज के प्राचार्य डॉ. महेशचंद्र शर्मा ने बताया कि यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक सामाजिक सरोकार का कोई काम करना था। महाविद्यालय में आने वाले ज्यादातर विद्यार्थी ग्रामीण क्षेत्र से आते हैं। ऐसे में फीस से लेकर छोटी-छोटी जरूरतों के लिए उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।
स्नातक के बाद आईएएस, आईपीएस, पीएससी, एसएससी, बैंक पीओ समेत तमाम तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी संसाधन नहीं जुटा पाते। इन्हीं आर्थिक कमियों को दूर करने सभी शिक्षकों ने मिलकर पहल की। हर महीने 500 रुपए या फिर अपनी स्वेच्छा से ज्यादा राशि वे उड़ान फंड के लिए देते हैं। पिछले एक साल में कई जरूरतमंद विद्यार्थी इसका लाभ भी ले चुके हैं।
खुद में अच्छा लगता है, हां हम कुछ कर रहे
उड़ान समिति की कोषाध्यक्ष डॉ. पी. वसंतकला कहती हैं कि उड़ान न सिर्फ बच्चों का बल्कि कॉलेज के हर एक स्टाफ की उम्मीदों का सपना है। गांव से आने वाले कई होनहार विद्यार्थियों को सिर्फ आर्थिक तंगी के चलते पढ़ाई छोड़ते हुए देखकर बहुत बुरा लगता था। हर बार मन में कसक रह जाती थी कि इनके लिए क्या किया जाए। इसलिए सबने मिलकर उड़ान के बारे में सोचा। आज प्रतिभाशाली निर्धन विद्यार्थियों को आईएएस, आईपीएस, पीएससी जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते देखकरअच्छा लगता है। हां हम कुछ रहे वाली बात दिल को सुकून देती है।
Published on:
06 Nov 2018 11:43 am
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