
मिनी इंडिया में आपकी नेकी के गवाह बनेंगे दुनिया के सात अजूबे, इस दिवाली मायूस चेहरों पर बिखेरे खुशियां
भिलाई . दीपावली पर पूरा शहर रौशनी से सराबोर होगा। घरों में मीठे पकवानों की खुशबू महकेगी। दोस्त-रिश्तेदार खुशियां और उपहार देंगे। इन सबके बीच शहर में एक तबका ऐसा भी होता है जो दिवाली पर न तो बच्चों के कपड़ों का इंतजाम कर पाते हैं और न ही उनके बीच मिठाइयों की मिठास घुलती है।
खुशियों की आस लगाए बैठा है तबका
यह वही गरीब और जरूरतमंद तबका है जो दीपावली पर आपसे खुशियों की आस लगाए बैठा है। ऐसे में अगर आप भी उनके चेहरों पर मुस्कान देखना चाहते हैं तो सुपेला घड़ी चौक चले आइए। यहां नेकी की वह दीवार है, जो आपको दूसरों की मदद करने का सिला देगी।
दुनिया के सात अजूबे आपकी नेकी की गवाह
दुनिया के 7 अजूबे आपकी की गई नेकी के गवाह बनेंगे। यहां चाहें तो पुराने कपड़े छोड़ आइए या कोई ऐसा सामान जिसकी अब आपको जरूरत नहीं। रखे गए कपड़े सैकड़ों जरूरतमंदों की उम्मीद को मुकाम देंगे। आपकी एक पहल से किसी के चेहरे पर खुशी झलक पड़ेगी।
सभी धर्मों में दी गई यही सीख
खुद के साथ जरूरतमंदों की भी परवाह करना एक इंसान के लिए किसी फर्ज से कम नहीं। सभी धर्म में यही सीख दी गई है। शायद यही वह बात है, जिसने अब तक दर्जनों लोगों को नेकी की इस दीवार तक पहुंचाया है। सुपेला सेवन वंडर के ठीक सामने बनाई गई दीवार पर कइयों ने अपने पुराने कपड़े और जरूरत के कई सामान जरूरतमंदों के लिए छोड़े हैं। अब आपकी बारी है।
मायूस चेहरों पर बिखेरे खुशियां
मायूस चेहरों पर खुशियां बिखेरने के मकसद से आस्था बहूद्देशीय संस्था सेक्टर-२ ने इस पहल को अंजाम देते हुए मामूली सी दीवार को नेकी की दीवार में तब्दील किया। अभी इसे दो दिन ही हुए हैं, लेकिन जरूरतमंदों की परवाह करने वालों ने इस दीवार को कपड़ों से भर दिया है।
त्योहार के ठीक पहले की गई इस पहल का फायदा लेने कई जरूरतमंद भी यहां पहुंचकर अपने लिए सामान जुटाते दिख रहे हैं। आस्था संस्था के अध्यक्ष प्रकाश गेडाम और सचिव राजेंद्र सुनगारिया ने बताया कि नेकी की इस दीवार को दीपावली के ठीक पहले बनाने का मकसद सिर्फ यही है कि जरूरतमंद की मदद हो सके।
पॉवर हाउस चौक में भी बनाई जा रही नेकी की दीवार
ऐसे ही नेकी की दीवार पॉवर हाउस चौक के समीप भी बनाई जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि नेकी की इस दीवार पर ऐसे समान या कपड़े छोड़ जाएं जो दूसरों के काम आ सके। ऐसा कुछ भी नहीं रखे जिसे पाकर वह जरूरतमंद खुश न हो। कपड़े अच्छी कंडीशन में हो, जिसे पहना जा सके। इस अच्छी कोशिश में संस्था के उपाध्यक्ष श्रवण चोपकर और संयोजक मनोज ठाकरे का भी सहयोग है।
Published on:
06 Nov 2018 11:15 am
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