
अगर आप भी बनाना चाहते है खुद का घर तो पढ़ लीजिए ये खबर, रेट देखकर उड़ जाएंगे होश
भिलाई. अगर आप भी खुद का घर बनाने का सपना देख रहे है तो आपकी परेशानियां बढ़ने वाली है। घर बनाने के लिए सबसे जरुरी सामानों के बढ़ते दाम आम आदमी की समस्या बढ़ा रहे है। छत्तीसगढ़ में ईंट की कीमतों पर खनिज विभाग का नियंत्रण ही नहीं है। दुकानदार जब चाहे अपने मन से ईंट की कीमतें बढ़ा रहे है। पिछले 45 दिनों में 3 बार ईंटों के दाम बढ़ चुके है। इसके अलावा सीमेंट और सरिया के दाम भी बढ़ रहे है। दुकानदार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के नियमों का भी पालन नहीं कर रहे हैं। जानिए मटेरियल्स के बढ़े हुए दामों के बारे में..
ईंट और रेत की कीमतों में वृद्धि का असर लोगों की जेब पर पड़ रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाने वालों का बजट ही गड़बड़ा गया है। फरवरी के बाद से सीमेंट, ईंट और रेत कीमत में काफी बढ़ोतरी हुई है। रेत की कीमत को लेकर तो मोलभाव तक होने लगा है। पहले एक डंपर रेत (600 वर्ग फुट) 11 हजार रुपए में मिलती थी। अब 12500 रुपए में मिल रही है। तो सरिया की कीमत में भी 350-400 रुपए प्रति क्विंटल इजाफा हुआ है। सीमेंट के दाम में प्रति बैग 30 रुपए तक वृद्धि हुई है।
दिसंबर में 3 हजार नग ईंटों से भरा एक ट्रक की कीमत ट्रांसपोर्टिंग सहित 12500 रुपए थी। 15 फरवरी तक एक हजार रुपए वृद्धि के साथ 13700 रुपए हुई। मार्च के तीसरे सप्ताह में 500 रुपए की फिर वृद्धि की गई है। एक ट्रक की कीमत 14200 हो गई है। 15 दिन बाद फिर से कीमत में वृद्धि करने की तैयारी चल रही है।
पिछले चार-पांच साल में ऐसा पहली बार हुआ कि गर्मी के सीजन में ईंट की कीमत में वृद्धि हुई हो। आमतौर पर ईंट के दाम गर्मी में कम हो जाते हैं। बारिश के सीजन से नवंबर- दिसंबर तक भट्ठा बंद रहता है। स्टॉक से सप्लाई से किए जाने की वजह से डेढ़ से दो हजार रुपए तक महंगा रहता है। जनवरी तक ईंट की कीमत अधिक होती है। फरवरी में ईंट का कारोबार जोर पकड़ लेता है।
मार्च-अप्रेल में कीमत कम हो जाती है। दिसंबर-जनवरी की तुलना में ईंट की कीमत में एक से ड़ेढ़ हजार तक कमी आती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है। जैसे-जैसे गर्मी बढ़ रही है, मार्केट में ईंट की डिमांड बढ़ रही है। ईंट भट्ठा संचालक भी कीमत में वृद्धि करते जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग के रेवेलीडीह, ननकट्ठी, आलबरस के ईंट भट्ठा दुकानदारों का कहना है कि 20 मार्च को ओला वृद्धि के साथ हुई बारिश से कच्ची ईंट खराब हो गई। इससे बड़ा नुकसान हुआ है। भट्ठे में ईंट भी नहीं है डिमांड अधिक है। इस वजह से लोग अपने ब्रांड के अनुसार ईंट की कीमत बढ़ा रहे हैं। हकीकत यह भी कि पिछले 2-3 साल में ईंट भट्ठे की संख्या में जबरदस्त वृद्धि हुई है। शिवनाथ और खारून नदी के किनारे ईंट भट्ठों की कतार लग गई है। गावों में ईंट भट्ठे खुल गए हैं।
Published on:
06 Apr 2019 03:34 pm
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