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दहेज देने के मामले में चलेगा मुकदमा, चार मार्च को अगली सुनवाई, पत्नी और ससुर को समंस जारी

दहेज देने के मामले में न्यायालय में अब मुकदमा चलेगा। इस मामले की सुनवाई आगामी चार मार्च को होगी। अनावेदक रुही अग्रवाल व विजय अग्रवाल को न्यायालय में उपस्थित होने संमंस जारी करने का आदेेश दिया है।

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दुर्ग@Patrika. दहेज देने के मामले में न्यायालय में अब मुकदमा चलेगा। इस मामले की सुनवाई आगामी चार मार्च को होगी। खास बात यह है कि नेहरु नगर निवासी निमिष अग्रवाल ने दीपक नगर निवासी अपनी पत्नी रुही अग्रवाल और ससुर विजय अग्रवाल समेत ७ लोगों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में परिवाद प्रस्तुत किया था। बाद में प्रकरण को विचारण के लिए न्यायाधीश डी.के. गिलहरे की अदालत में स्थानांतरित किया गया। @Patrika. न्यायाधीश ने ४ जनवरी को फैसला सुनाते दहेज एक्ट की धारा ३ के तहत मुकदमा चलाने परिवाद को पंजीबद्ध किया। साथ ही अनावेदक रुही अग्रवाल व विजय अग्रवाल को न्यायालय में उपस्थित होने संमंस जारी करने का आदेेश दिया है।

दहेज देना भी उतना ही गंभीर अपराध है जितना दहेज लेना
जानकारी के अनुसार रुही अग्रवाल ने सुपेला थाना में पति निमिष समेत ससुराल के अन्य सदस्यों के खिलाफ शिकायत की थी। रूही ने ससुरालियों को दो करोड़ रुपए दहेज के रुप में देने का खुलासा किया है। इस शिकायत को आधार बनाते हुए सुपेला पुलिस ने निमिष और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्रताडऩा और दहेज एक्ट के तहत ७ मई २०१६ को एफआईआर किया। वर्तमान में निमिष अग्रवाल जमानत पर है। @Patrika. उद्योगपति निमिष अग्रवाल ने परिवाद में कहा है कि उसक ी पत्नी रुही और ससुर ने दहेज देने की बात स्वीकार की है। दहेज देना भी उतना ही गंभीर अपराध है जितना दहेज लेना। न्यायाधीश डी. के. गिलहरे ने प्रथम दृष्टया परिवाद में दिए गए आधार को सही ठहराते हुए पंजीबद्ध कर मुकदमा चलाने का आदेश देते हुए सुनवाई की तारीख निर्धारित की है।

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परिवाद के साथ यह भी प्रस्तुत किया
परिवाद के साथ निमिष ने सुपेला थाना में दर्ज एफआईआर को मुख्य दस्तावेज के रुप में प्रस्तुत किया। जिसमे रुही और विजय अग्रवाल ने स्वीकार किया है कि उन्होंने निमिष के परिवार वालों की दहेज मांग पर दो करोड़ रुपए दिए। @Patrika. इसके अलावा महिला एवं बाल विकास विभाग के समक्ष घरेलू हिंसा के तहत रुही द्वारा प्रस्तुत आवेदन को भी साक्ष्य के रुप में प्रस्तुत किया गया था।

आगे क्या
इस मामले में सुनवाई के लिए न्यायाधीश ने तारीख निर्धारित कर दी है। निर्धारित तिथि में अनावेदक को उपस्थित होकर जमानत लेना पड़ेगा या फिर उन्हें निचली अदालत के फैसले को चुनौती देना होगा। फैसले को चुनौती देने के लिए पर्याप्त आधार होना आवश्यक है।