
भिलाई. आदिवासी युवाओं का बेहतर कॅरियर बनाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोडऩे इंडो तिब्बत बार्डर पुलिस की मुहिम रंग ला रही है। सीपेट ट्रेनिंग के जरिए अब तक 575 युवाओं की जिंदगी बदल चुकी है और अब सातवें चरण में माओवादी क्षेत्र के 22 युवा भी अपने नए सफर पर निकल पड़े हैं।
हरी झण्डी दिखा कर रवाना
शुक्रवार को राजनांदगांव स्थित आईटीबीपी के सामरिक मुख्यालय से युवाओं का यह दल सीपेट रायपुर में टेनिंग लेने रवाना हुआ। इस ग्रुप को क्षेत्रीय मुख्यालय के सेनानी(एएनओ) शेण्डिल कुमार ने हरी झण्डी दिखा कर रवाना किया। इस अवसर पर सेकंड इन कमान सैय्यद जावेद अली, डिप्टी कमांडेंट चन्दन मिश्रा , डिप्टी कमांडेंट विनोद लक्ष्मी नारायण ठाकुर, डिप्टी कमांडेंट के रामराज आदि मौजूद थे।
सात चरणों में हुई ट्रेनिंग
आईटीबीपी ने राजनांदगांव जिले में 9 साल पहले माओवादी क्षेत्र में मोर्चा संभाला। सुरक्षा संबंधी अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए आईटीबीपी ने माओवादी क्षेत्र के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने एक मुहिम चलाई। जिसमें मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत छत्तीसगढ़ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एवं तकनीक संस्था(सीपेट) से विभिन्न कोर्स कराए ताकि उनकी काबिलियत के अनुसार उन्हें बेहतर कार्यक्षेत्र मिल सकें।
आगे बढऩे का नया रास्ता
डीआईजी अशोक कुमार नेगी की इस पहल से जैसे क्षेत्र के युवाओं को आगे बढऩे का नया रास्ता मिल गया। अब तक सात चरणों में 575 युवाओं को अलग-अलग टेंड में ट्रेनिंग दी गई। जिसमें से 274 युवा भारत के विभिन्न शहरों में रोजगार मिल गया। आठवे चरण में 22 युवाओं का ग्रुप तैयार किया गया जो अब अपने बेहतर भविष्य के लिए प्रशिक्षण लेंगे।
हमने निभाई जिम्मेदारी
आईटीबीपी 40 वीं बटायिन के कमान अधिकारी शेण्डिल कुमार के नेतृत्व में माओवादी क्षेत्र के लोग भी अपना बेहतर जीवन बिता रहे हैं। सेकंड इन कमान सैय्यद जावेद अली ने बताया कि सीपेट के अलावा उनकी छोटी-बड़ी जरूरतों का ख्याल भी फोर्स रखती है। खासकर युवाओं को कम्प्यूटर प्रशिक्षण के साथ-साथ रोजगार संबंधी ट्रेनिंग कारपेन्टरी, मैसनरी, प्लम्बिंग आदि का प्रशिक्षण भी चौकियों में दिया जा रहा है। ताकि उनके हाथों में कुछ हुनर आ सकें।
Published on:
07 Apr 2018 10:39 pm
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