
दुर्ग. स्वास्थ्य विभाग पहली बार पुरुष नसबंदी के लिए अभियान चला रहा है। वजह यह बताया जा रहा है कि जिला पुरुष नसबंदी में बहुत पिछड़ा हुआ है। भले ही हमारा जिला साक्षर है। उच्च शिक्षित लोग भी अधिक है,ं पर नसबंदी के मामले में उनकी सोंच नहीं बदली है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान नसंबदी को लेकर पुरुषों की सोच को बदलने का भी है।
वैवाहिक जीवन प्रभावित होगा
आमतौर पर पुरुष यह सोंचता है कि नसबंदी करवाने के बाद वे कमजोर हो जाएंगे। वैवाहिक जीवन प्रभावित होगा। चिकित्सा अधिकारियों का कहना है यह केवल भ्रम है। नसंबदी के बाद भी पुरुषों में किसी तरह की कमजोरी नहीं आती। जीवन के उत्साह में कोई फर्क नहीं पड़ता। डाक्टरों ने बताया कि पुरुष नसबंदा के मामले में वनाचंल क्षेत्र आगे है। बस्तर संभाग में नसंबदी कराने में पुरुषों की संख्या हर साल पूरे प्रदेश में अधिक होती है।
घर-घर खोज रहे नसबंदी कराने वाले पुरुष
पुरुषों की नसबंदी के लिए जिले में २१ से २७ नवंबर तक संपर्कअभियान चलाया जाएगा। जिसमें आपरेशन कराने वाले इच्छुक पुरुषों को चिन्हित कर उनका पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद २८ नवंबर से ४ दिसंबर तक ऑपरेशन किया जाएगा। जनसंख्या स्थरीकरण अभियान के प्रभारी अधिकारी डॉ. सुदामा चंद्राकर ने बताया कि नसबंदी ऑपरेशन जिला अस्पताल, सुपेला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र धमधा, अहिवारा, पाटन और उतई में किया जाएगा।
लक्ष्य 470 पुरुष नसबंदी का
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि दो बच्चे के बाद आमतौर पर महिलाएं ही नसंबदी कराती हैं। अब दो साल से पुरुष नसबंदी पर फोकस किया जा रहा है। इस साल तो अभियान चलाया जा रहा है। जिसमें ४७० पुरुष नसबंदी आपरेशन का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य में २२८ हाथ से ऑपरेशन और शेष २४२ ऑपरेशन दूरबीन पद्धति से किया जाएगा।
परिवार नियोजन में पुरुषों कितना है का योगदान
वर्ष २०१२-१३ में १६७
२०१३-१४ में २३२
२०१४-१५ में १२६
२०१५-१६ में १६४
२०१६-१७ में १२७
प्रभारी डॉ. सुदामा चंद्राकर ने बताया कि पुरूषों को नसबंदी के लिए जागरुक किया जा रहा है। भ्रांतियां दूर की जा रही है। पुरूषों के नसबंदी के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
Published on:
18 Nov 2017 10:53 am

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