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जिस समिति का कलक्टर अध्यक्ष उसमें 10 लाख का घपला, पढि़ए पूरी खबर

जिला अस्पताल में जीवनदीप समिति में लाखों की हेराफेरी का मामला सुलझा भी नहीं था कि इसके ब्लड बैंक में 10 लाख रुपए का घपला सामने आया है।

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10 lakh scam of Durg blood bank

दुर्ग. जिला अस्पताल में जीवनदीप समिति में लाखों की हेराफेरी का मामला सुलझा भी नहीं था कि इसके ब्लड बैंक में 10 लाख रुपए का घपला सामने आया है। इस ब्लड बैंक को रेडक्रॉस सोसायटी संचालित कर रही है। ताज्जुब यह है कि यहां के आय-व्यय का हिसाब बताने वाली लेजर बुक खाली है। इस गड़बड़ी को छुपाने के लिए तीन साल की नोटशीट की फाइल गुम कर दी गई।

ब्लड बैंक में वर्ष 2012 से दिसंबर 2015 तक का हिसाब गायब
अंतराष्ट्रीय मानकों पर तैयार ब्लड बैंक में वर्ष २०१२ से दिसंबर २०१५ तक का हिसाब गायब कर दिया गया है। इस मामले की प्रारंभिक जांच में ही दस लाख की गड़बड़ी सामने आ चुकी है। पूरी पड़ताल में इस राशि में इजाफा हो सकता है। इस घपले का खुलासा होने के बाद अब सभी जिम्मेदार पल्ला झाडऩे में लगे हैं। फिलहाल एडीएम संजय अग्रवाल के निर्देश पर सिविल सर्जन ने तत्कालीन लिपिक जितेंद्र कुमार जोगवंशी का वेतन रोकने का आदेश दिया है।

ऐसे उजागर हुई गड़बड़ी
रेडक्रास सोसायटी से संचालित ब्लड बैंक के आय-व्यय का तीन वर्ष से ऑडिट नहीं हुआ। जब वर्ष 2015 से 2017 तक का ऑडिट कराने लेजर बुक, बिल आदि सीए को भेजे गए तो उन्होंने पुराना रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा। इस पर ब्लड बैंक से जानकारी दी गई कि ऑडिट नहीं कराया है। सीएम ने पहले पूर्व वर्षों का ऑडिट कराने का कहकर फाइल लौटा दी। तब जिम्मेदारों की नींद खुली और पत्राचार शुरू हुआ।

नोटशीट गायब होने पर क्लर्क का वेतन रोका
सामान खरीदी और खर्चों के लिए नोटशीट चलाई जाती है। इसमें ब्लड बैंक प्रभारी व अन्य सक्षम अधिकारियों के दस्तखत होते हैं। ये फाइल गायब है। सामान खरीदी में इस्तेमाल की गई रसीद बुक भी रिकॉर्ड रूम में नहीं मिली। लिपिक जितेन्द्र जोगवंशी को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए वेतन रोका गया है।

एफआईआर कराने में पीछे हट गया प्रशासन
आर्थिक अनियमितता के मामले में एफआईआर नहीं कराई गई है, जबकि आय-व्यय से जुड़ी फाइल और दस्तावेज गायब हैं। इनके गायब होने की जानकारी अधिकारियों को एक वर्ष पहले से थी। लेकिन खानापूर्ति करके मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

तत्कालीन प्रभारी हो चुके पदोन्नत
इस गड़बड़ी के समय ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. जेपी मेश्राम थे। बाद में वे सिविल सर्जन बनाए गए। खरीदी की नोटशीट में हस्ताक्षर उन्हीं के हैं। अधिकारियों की माने तो नोटशीट की फाइल डॉ. मेश्राम के रहते हुए गायब हो चुकी थी। वर्तमान में डॉ. मेश्राम पदोन्नत हो गए हैं। उनका कार्यालय संचानालय में है।

जीवनदीप और रेडक्रॉस दोनों के अध्यक्ष कलक्टर
15 दिनों में आर्थिक अनियमितता के दो मामले सामने आ चुके हैं। जीवनदीप समिति में २.४० लाख रुपए की गड़बड़ी के लिए तीन कर्मचारियों को रिकवरी लेटर जारी किया गया है। इसमें पांच लाख रुपए का उल्लेख है। अब रेडक्रॉस सोसायटी के ब्लड बैंक में 10 लाख का गोलमाल सामने आया है। इन दोनों समितियों के अध्यक्ष कलक्टर होते हैं।

सचिव भी गैर सरकारी डॉक्टर- अन्य जिलों में रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष कलक्टर हैं और सचिव का जिम्मा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपा गया है। वहीं दुर्ग जिले में सचिव का प्रभार स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके डॉ. प्रभात पाण्डेय के पास है।

टेक्निशियन के जिम्मे हिसाब- ब्लड बैंक में आय-व्यय का काम अकाउंटेंट की बजाय टेक्निशियन के जिम्मे है। जिस कर्मचारी के समय फाइल गुमी वह पैथोलॉजी विभाग का टेक्निशियन है। अभी यहां का प्रभार संभाल रहे एसपी साहू भी लैब टेक्निशियन हैं।

मुबंई से आए अधिकारी
दुर्ग जिला ब्लड बैंक मदर ब्लड बैंक है। ब्लड बैंक से निजी अस्पतालों के अलावा पड़ौसी बालोद, बेमेतरा, कवर्धा के जिला अस्पताल भी जुड़े हैं। ब्लड बैंक का पंजीयन नवीनीकरण भी हर वर्ष कराना होता है। इस ब्लड बैंक को देखने नेशनल ब्लड बैंक एसोसिएशन के पदाधिकारी दो दिन पहले जिला अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने भी ब्लड बैंक के रखरखाव को लेकर आवश्यक दिशा निर्देश दिए हैं।