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भिलाई . मेरी ख्वाहिश है, पढ़ाई जारी रहे...। यह अल्फाज उन जरूरतमंद बच्चों के हैं जो पैसों की तंगी की वजह से अपनी पढ़ाई बीच में ही रोकने पर मजबूर हो जाते हैं। परिवार का मुखिया सिर्फ दो वक्त की रोटी जुटाने में ही पूरा दिन गुजार देता है। आमदनी इतनी नहीं कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए अच्छे स्कूल और कॉलेजों में दाखिला करा सके। ऐसे बच्चों के अरमानों को अब पानी नहीं फिरेगा। प्रदेश के कुछ नौजवानों को साथ लेकर मुस्लिम समुदाय के वरिष्ठ लोगों ने इन होनहारों के ख्वाब पूरे करने का बीड़ा उठाया है। हम बात कर रहे हैं, जकात फाउंडेशन की जो इस साल भिलाई-दुर्ग के सौ से अधिक बच्चों की पढ़ाई का पूरा खर्च वहन करेगा। उनके स्कूल-कॉलेज की फीस से लेकर कॉपी किताब भी जकात फाउंडेशन ही दिलाएगा।
1500 जरूरतमंद बच्चों ने दिए थे आवेदन
रमजान की शुरुआत के साथ ही इसके लिए आवेदन शुरू किए गए थे। आवेदन की अंतिम तिथि 3 जुलाई थी। इतने दिनों में फाउंडेशन को 1500 से अधिक ऑनलाइन फार्म मिले, जिनमें से १२०-१५० फार्म दुर्ग-भिलाई के बच्चों के थे। यह स्कॉलरशिप मुस्लिम समुदाय के बच्चों के लिए ही रखी गई, जिसमें दीगर कौम के जरूरतमंद बच्चों ने भी इस पहल का लाभ लेने फार्म भरे। इनकी संख्या चुनिंदा ही थी, इसलिए इन्हें भी फाउंडेशन शिक्षा से जोडऩे में कसर नहीं छोड़ेगा।
5 लोगों ने शुरुआत की, अब 700 सदस्य
जकात फाउंडेशन की शुरुआत कुछ साल पहले ५ मुस्लिम युवाओं ने मिलकर की। इरादा सिर्फ इतना था कि इस्लाम के मुताबिक जो जकात निकली जाए, उससे किसी जरूरत मंद का फायदा हो सके। धीरे-धीरे यह सोच हर किसी के मन को भा गई। 5 लोगों ने शुरू हुआ कारवां अब 700 से अधिक सदस्यों तक पहुंच गया है। इसमें मुस्लिम समुदाय के डॉक्टर, इंजीनियरिय, लॉयर, सरकारी अधिकारी हर कोई जुड़ा है, जो अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा डोनेट करते हैं।
यह करते हैं फाउंडेशन का संचालन
दूसरों के काम आने की यह उमदा सोच फाउंडेशन के अध्यक्ष सैय्यद अकील कमाल की है, जिसमें सेके्रटरी मोहम्मद ताहिर, मोहम्मद इमामुद्दीन, अकरम सिद्दकी, फैजल रिजवी, मखमुर इकबाल और इरफान बुखारी सहित ७०० से अधिक सदस्य हैं।
Published on:
06 Jul 2018 12:27 pm

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