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Breaking : अजीत जोगी मांग रहे थे नारियल मिल गया हल जोतता किसान, जानें क्या है वजह

सात सूत्रीय मांगों को लेकर जोगी ने निर्वाचन कार्यालय पीएम आवास के लिए मौन रैली निकाली ।
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बिलासपुर

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Anil Kumar Srivas

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Updated: 6 Jul 2018, 12:41 PM IST

ajit jogi

Breaking : अजीत जोगी मांग रहे थे नारियल मिल गया हल जोतता किसान, जानें क्या है वजह

सतीश यादव/बिलासपुर. पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जे) के संस्थापक और शुक्रवार सुबह 9 बजे दिल्ली स्थित केंद्रीय निर्वाचन आयोग के कार्यालय पहुंचकर वहां पर उन्होंने चुनाव चिन्ह हल जोतता किसान के लिए आवेदन किया है। इससे पहले नारियल चिन्ह की मांग किया था लेकिन चिन्ह पहले से आबंटित हो जाने के कारण नहीं दिया गया। इसके बाद सात सूत्रीय मांगों को लेकर जोगी ने निर्वाचन कार्यालय पीएम आवास के लिए मौन रैली निकाली है। जनता कांग्रेस सुप्रीमो जोगी ने सुबह करीब 9 बजे भारत के निर्वाचन सदन में कार्यालय खुलते ही चुनाव चिन्ह आवंटन के लिए पहला आवेदन प्रस्तुत कर दिया। जानकारी के मुताबिक, जोगी ने चुनाव चिन्ह के लिए 'खेत जोतते किसानÓ को प्राथमिकता दी है। उसके बाद दूसरे चिन्ह रखे गए हैं, इसमें नारियल भी शामिल है। जानकारी के अनुसार जनता कांग्रेस का स्थापना 6 जून 2016 को मरवाही के कोटमी के मैदान में हुआ था इस कार्यक्रम मरवाही क्षेत्र के हजारों जनता के सामने जोगी ने छत्तीसगढ़ के हित के लिए अलग से पार्टी बनाने का एलान किया था। शुक्रवार को अजीत जोगी ने निर्वाचन कार्यालय के निकलने के बाद सात सूत्रीय मांगो को लेकर मौन रेली निकाली है। रैली पीएम आवास में मांगो को लेकर ज्ञापन दिया जाएगा।

यहां हुआ था एलान : 21 जून 2016 को मुख्यमंत्री रमन सिंह के गृह नगर कवर्धा स्थित ठाठापुर ग्राम में पूर्व सीएम अजित जोगी ने कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया था। इस सम्मेलन में जोगी के समर्थक इकठ्ठा हुए, जहां विधिवत पार्टी के नाम का ऐलान किया गया। इस सम्मेलन में जोगी के विधायक पुत्र के अलावा कांग्रेस का कोई भी मौजूदा विधायक नहीं पहुंचा था।

ये हैं सात सूत्रीय मांगें : 1. 2003 के वायदे के अनुसार किसानों को 2100 रुपए समर्थन मूल्य और बकाया तीन साल का 3 सौ रुपए बोनस दिया जाए। महाराष्ट्र एवं उत्तरप्रदेश में कर्ज माफी की जा सकती है तो छत्तीसगढ़ के किसानों से सौतेला व्यवहार क्यूं। 2. छत्तीसगढ़ सरकार आउटसोर्सिंग नीति पर तत्काल रोक लगाई जाए। छत्तीसगढ़ के स्थानीय युवाओं को 90 प्रतिशत आरक्षण मिले। कपड़ा, धुलाई, मछली पालन, दूध सप्लाई कार्य जाति वर्ग के हिसाब से ठेका दिया जाए। 3. छत्तीसगढ़ के 40 हजार परिवार एवं सरंक्षित जनजातियों को नष्ट कर रहे कोलावरम बांध पर तत्काल रोक लगाई जाए। 4. नगर मार्ग इस्पात एवं निजीकरण पर रोक लगाई जाए। 5. महानदी, इंद्रावती और कनहर नदियों से संबंधित अंतराष्ट्रीय समझौतों में छत्तीसगढ़ के साथ हो रहे अहित को रोक जाए। 6. छत्तीसगढ़ संपूर्ण अर्थव्यवस्था उत्पादन आधारित है। जबकि जीएसटी केवल उपभोक पर देय है। इससे छत्तीसगढ़ को रहे सालाना 25 हजार करोड़ का नुकसान की भरपाई केन्द्र सरकार द्वारा की जाए। 7. छत्तीसगढ़ में 35 प्रतिशत से ज्यादा आबादी आदिवासी, अनुसूचित क्षेत्रों में निवासारत है। उनका सरकार द्वारा अवैधानिक तरीके से डीलमिली, नगरनार, घाटबर्रा आदि जगह के लोगों को बेदखली किया जा रहा है उस पर रोक लगाई जाए।