
विदेश यात्रा करने वालों को अब भारत सरकार जल्द देगी हाईटेक पासपोर्ट, IIT भिलाई में तैयार हो रहा स्ट्रक्चर, जाली पासपोर्ट बनाना नामुमकिन
भिलाई. विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को अब भारत सरकार जल्द ही हाईटेक पासपोर्ट (Hi-Tech Passport ) देने वाली है। आपके मौजूदा पासपोर्ट को ई-पासपोर्ट में बदला जाएगा। इस हाईटेक पासपोर्ट को तैयार करने में शीर्ष संस्थान आईआईटी भिलाई (IIT Bhilai) अहम भूमिका अदा करेगा। आईआईटी के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के साथ मिलकर ई-पासपोर्ट जारी करने के लिए एक बेसिक स्ट्रक्चर तैयार किया है। आईआईटी के डायरेक्टर प्रो. रजत मूना भारत सरकार के साथ मिलकर ई-पासपोर्ट तैयार करने में जुट गए हैं। ई-पासपोर्ट के जरूरी सॉफ्टवेयर पर काम शुरू हो गया है। ई-पासपोर्ट स्कोस्टा चिप सीएल तकनीक का उपयोग करेगा। नया पासपोर्ट एटीएम कार्ड की तरह दिखेगा, जिसमें क्रिप्टोग्राफी प्रोसेस शामिल होगा। यानी इसकी कोई भी नकल नहीं कर पाएगा, जिससे जाली पासपोर्ट बनाना भी नामुमकिन हो जाएगा।
साल 2002 से प्रोजेक्ट पर काम
परिवहन अनुप्रयोगों के लिए आईआईटी कानपुर में प्रोफेसर मूना ने यह तकनीक 2002 में विकसित की थी। इसे सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में स्मार्ट कार्ड के तौर पर उपयोग किया जाता है। इस तकनीक से ड्राइविंग लाइसेंस, पंजीकरण कार्ड, विभिन्न आईडी कार्ड (आरएसबीवाय) कार्ड भी जारी होते है। अब इस तकनीक को और भी प्रवानी बनाने के बाद ई-पासपोर्ट में लॉन्च करने की तैयारी है।
हाईटेक टेक्नोलॉजी का उपयोग
के्रेडिट कार्ड की तरह दिखने वाले इस पासपोर्ट के चिप में मेमोरी के साथ प्रोसेसर होता है, जो टेम्पर फ्रूप (नकलरोधी) ऑपरेटिंग सिस्टम से चलता है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि चिप सूचनाओं को संग्रहित भी कर सकती है। चिप के अंदर के डाटा को ऑपरेटिंग सिस्टम में एक्सेस कंट्रोल प्रोटोकॉल के माध्यम से एक्सेस किया जाता है। कार्ड की मेमोरी 4 केबी से 150 केबी तक की होती है । स्मार्ट कार्ड के अंदर का प्रोसेसर 8 या 32 बिट का क्रिप्टोग्राफिक प्रोसेसर होता है। वर्तमान में स्मार्टकार्ड का प्रयोग स्वास्थ्य, बैंकिंग और टिकट प्रणाली आदि में हो रहा है।
एडवांस कोडिंग का उपयोग होगा
प्रो. रजत मूना, डायरेक्टर, आईआईटी भिलाई ने बताया कि हाईटेक ई-पासपोर्ट तैयार करने की ओर अग्रसर हैं। पासपोर्ट एक तरह के के्रेडिट कार्ड की तरह दिखेगा, जिसमें आधुनिक चिप और एडवांस कोडिंग का उपयोग होगा। इस पासपोर्ट की नकल नहीं की जा सकेगी।
Published on:
22 Feb 2022 12:02 pm
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