
दुर्ग . सरोवर-धरोहर योजना के तहत तालाबों को संवारने में असफल सरकार अब पार्षद निधि से तालाबों की सफाई और गहरीकरण कराएगी। यह कार्य 30 जून तक मिशन मोड पर कराए जाएंगे। इसके लिए पार्षद निधि के कामों में सरोवर धरोहर योजना को जोड़ा गया है। जानकारों की मानें तो सरकारी खजाना खाली होने के कारण राज्य शासन द्वारा यह निर्णय किया गया है।
नहीं हो पाएंगे सड़क-नाली के काम
अब तक पार्षद निधि से पार्षदों की अनुशंसा पर केवल सड़क, नाली व छोटे मूलभूत जरूरत के काम कराए जाते थे। पार्षदों द्वारा जनता की डिमांड के आधार पर यह काम स्वीकृत किए जाते थे, लेकिन राशि सरोवर धरोहर में खर्च किए जाने के कारण इस बार पार्षद काम स्वीकृत नहीं कर पाएंगे।
पहले के ही काम नहीं हो पाए शुरू
वहीं सरोवर धरोहर योजना के तहत अलग से राशि स्वीकृत कर कराए जा रहे थे, लेकिन राशि की कमी के कारण योजना के तहत पहले से स्वीकृत कई काम शुरू नहीं हो पाए हैं। इसलिए अब इसे पार्षद निधि के साथ जोड़कर काम कराने का निर्णय किया गया है।
टेंडर की नहीं होगी जरूरत
पार्षद निधि से तालाबों की सफाई व गहरीकरण के काम के लिए निविदा बुलाने की बाध्यता नहीं रहेगी। राज्य शासन ने निविदा की प्रक्रिया में संभावित देरी को देखते हुए इस पर छूट दी है। निविदा की जगह कलक्टर द्वारा निर्धारित दर वाहन किराए पर लेकर काम कराया जा सकेगा।
होगा मुरुम और मिट्टी का भी हिसाब
तालाबों की सफाई और गहरीकरण के निकलने वाले मिट्टी व मुरुम का भी निगम को हिसाब रखना होगा। इसके लिए वाहनों का नियमानुसार लॉग बुक मेंटेन करना होगा। वहीं मिट्टी व मुरुम जरूरत वाले जगहों पर फिलिंग कर दिखाना होगा। वहीं गहरीकरण के लिए एक हेक्टेयर क्षेत्रफल में अधिकतम 3 लाख रुपए ही खर्च किया जा सकेगा।
पार्षदों को 4, एल्डरमेन को 3 लाख
पार्षदों को एक साल में 4 लाख और एल्डरमेन को 3 लाख रुपए विकास निधि के रूप में मिलता है। जिससे इन्हें अपनी मर्जी से निर्माण व विकास कार्य स्वीकृत करने का अधिकार होता है। नगर निगम दुर्ग में 60 पार्षद व 9 एल्डरमेन है। इस तरह इस निधि के 2 करोड़ 67 लाख से सरोवर धरोहर के काम कराए जा सकेंगे।
Published on:
12 Apr 2018 10:07 pm
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