
मुकेश साहू@राजनांदगांव. जलवायु परिवर्तन के लिए संसाधन उपलब्ध कराने और उसकी उपयोगिता को बढ़ाने जिले में पायलेट प्रोजेक्ट पर शोध कार्य चल रहा है। आईसीआरजी योजना के तहत जल वायु परिवर्तन के लिए अधोसंचरना निर्माण के उद्देश्य से ड्रोन कैमरे के माध्यम से क्षेत्र की मैपिंग की जा रही है।
जलवायु परिवर्तन से परिस्थितियां बदलेंगी
इस संबंध में आईआईटी कानपुर की टीम गुरुवार को छुईखदान व मोहला ब्लॉक के कुछ गांवों का जायजा लेने पहुंची। टीम द्वारा ड्रोन कैमरे से जलवायु परिवर्तन की उपयोगिता के संबंध में जानकारी ली गई। मिली जानकारी के अनुसार आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन से परिस्थितियां बदलेंगी।
भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया जाएगा
इस दौरान ग्रामीणों को पेयजल व निस्तारी के लिए किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसे लेकर आईसीआरजी द्वारा शोध किया जा रहा है। पहले चरण मेंं जिले के छुईखदान, मोहला व राजनांदगांव ब्लॉक के कुछ गांवों में इस संबंध में कार्य किया जाएगा। इसके लिए ड्रोन कैमरे से भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया जाएगा।
मनरेगा के तहत होगा संबंधित काम
जलवायु परिवर्तन के दौरान भौगोलिक परिस्थितियां बदलने पर लोगों के जीवकोपार्जन व पानी की समस्या हो सकती है। इस दौरान पानी की पर्याप्तता के लिए क्षेत्र में जल संवर्धन के लिए कई कार्य कराए जाएंगे। जिसमें जल भराव व संरक्षण के लिए मनरेगा के तहत गांवों में स्वीक मेशनरी चेक डेम, बोल्डर चेक, गेबियन स्ट्रक्चर, अंडर ग्राउंड डाइक, परकोलेसन टैंक, वृक्षारोपण सहित अन्य कार्य कराए जाएंगे।
पायलेट प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो रहा है
इस संबंध में कार्य योजना प्रारंभ करने जिले में पायलेट सर्वे किया जा रहा है। जिला पंचायत सीईओ चंदन कुमार ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने जिले में पायलेट प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो रहा है। आईआईटी कानपुर की टीम सर्वे करने पहुंची थी। ड्रोन कैमरे से भौगोलिक स्थिति की जानकारी ली जा रही है।
Published on:
23 Dec 2017 11:49 am
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