
भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मियों के हाथ से एक-एक कर सुविधाएं फिसलती जा रही है। श्रमिक नेता वर्चस्व की लड़ाई में कर्मियों के हितों को नजर अंदाज कर रहे हैं। वहीं अधिकारियों में कर्मियों की अपेक्षा एक जुटता कहीं अधिक नजर आती है। यही वजह है कि सेल कॉरपोरेट ऑफिस में बैठे अधिकारियों से लेकर बीएसपी के आला अधिकारी तक सभी ने अपने हिस्से में कटौती को आने नहीं दिया। कर्मियों की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह की सुविधाओं पर इसकी मार पड़ी है। वहीं अधिकारियों की सुविधाओं में कोई खास अंतर नजर नहीं आ रहा है।
स्कूलों में नहीं हो रही नई भर्ती
बीएसपी कर्मचारियों के बच्चों को पहले बेहतर शिक्षा बीएसपी स्कूलों में मिल जाती थी। स्कूलों व उसमें पढऩे वाले बच्चों की तादात भी अधिक होती थी। अब पुराने शिक्षक सेवानिवृत हो रहे हैं और नई भर्ती प्रबंधन ने बंद कर रखी है। इससे स्कूलों में पढ़ाई का स्तर धीरे-धीरे गिरता चला जा रहा है। मजबूरी में बीएसपी कर्मचारी भी अपने बच्चों को निजी और महंगे स्कूलों में पढऩे के लिए भेज रहे हैं।
हॉस्पिटल का बिना चिकित्सक के बेहतर स्ट्रक्चर
जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केन्द्र, सेक्टर-9 के स्ट्रक्चर को प्रबंधन पहले से बेहतर करते जा रहा है। यहां कमी चिकित्सकों है। ह्दयरोग विशेषज्ञ दस्तावेजों में हैं, लेकिन हकीकत में नहीं है। इसी तरह से न्यूरो सर्जन की भी जरूरत है। कर्मियों और उनके परिवार को बेहतर उपचार के लिए अन्य प्रदेश जाना पड़ता है। सप्ताह में कुछ दिन निजी हॉस्पिटल के चिकित्सक आते हैं और इसके बाद मरीज भगवान भरोसे।
जर्जर आवास, मेंटनेंस पर नहीं ध्यान
बीएसपी के कर्मचारी जर्जर आवास में जीवनयापन कर रहे हैं। मेंटनेंस के अभाव में आवास के छतों से प्लास्टर गिरते रहते हैं। नए भर्ती होने वाले कर्मचारी अब एक कमरे के मकान में परिवार के साथ रहने तैयार नहीं है, उनको बड़े मकान और उसमें 24 घंटे पानी जैसी सुविधा चाहिए।
पहले दुर्घटना बीमा कंपनी के जिम्मे था अब कर्मियों के वेतन से भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारियों का दुर्घटना बीमा पहले कंपनी करवाती थी। अब उसे पिछले दो दशक से कर्मचारियों के वेतन से जोड़ दिया गया है। कार्यस्थल पर दुर्घटना का कारण कंपनी है। युवा कर्मचारी इस बात से नाराज हैं।
संयंत्र के कैंटीन बदहाल
युवा कर्मियों का कहना है कि सेल के बड़े अधिकारी सेल कारपोरेट कार्यालय में अपने लिए स्पेशल कैंटीन बनाए हुए है। इसका रेट भी दिल्ली जैसे शहरों के मुकाबले काफी कम है। वहीं भिलाई इस्पात संयंत्र के कैंटीन का रेट और क्वालिटी किसी से छुपा नहीं है।
यहां भी वसूल रहे कर्मियों से पैसे
युवा कर्मचारियों का कहना है कि ईएफबीएस से लेकर मेडीक्लेम तक में कर्मियों से पैसा लिया जा रहा है। इसके लिए एनजेसीएस यूनियन के नेता जिम्मेदार हैं। वे नई सुविधा दिला तो नहीं रहे हैं, बल्कि पुरानी सुविधाओं में भी कटौती करवाते जा रहे हैं।
फैक्ट फाइल
- डेली रिवार्ड स्कीम बंद हुई है।
- बीएसपी स्कूलों में नए शिक्षकों की भर्ती बंद
- संयंत्र में सेवानिवृत हो रहे कर्मियों की संख्या की अपेक्षा 10 फीसदी भर्ती,
Published on:
28 Nov 2023 01:07 pm
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