
फेमली काउंसिलिंग की रिपोर्ट : पति-पत्नी के बीच आया मोबाइल, बसने के पहले उजड़ रहा परिवार
कोमल धनेसर/भिलाई@Patrika. सोशल मीडिया ने दुनिया के बीच की दूरी जितनी कम की है, उतनी ही दूसरी एक घर में रहने वाले दो लोगों के बीच बढ़ा दी है। पुलिस परामर्श केन्द्र में आने वाला हर तीसरे मामले की जड़ फेसबुक और वाट्सऐप हैं, जिन्होंने सालभर में तीन सौ से ज्यादा जोड़ों को कोर्ट की दहलीज तक पहुंचाया। घर की चारदीवारी से शुरू हुई पति-पत्नी के बीच झगड़े की जड़ कहीं न कही मोबाइल पर आकर खत्म हो रही है। @Patrika सोशल मीडिया में सैकड़ों दोस्त बनाकर रियल लाइफ में पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हंै।
पति और पत्नी की शिकायत में सोशल मीडिया की दखलअंदाजी
महिला थाने में रोजाना होने वाली काउंसिलिंग में अधिकांश मामलों में पति और पत्नी की शिकायत में सोशल मीडिया की दखलअंदाजी सबसे ज्यादा देखने मिली। काउंसिलर्स की मानें तो थाने तक पहुंचने वाले मामलों में ज्यादातर नवब्याहता ज्यादा पहुंच रहे हैं। थाना प्रभारी सी तिर्की ने बताया कि 2019 में मात्र डेढ़ महीने में जितने केस दर्ज हुए हैं पिछले वर्ष 6 महीने में भी उतने नहीं हुए थे।
मोबाइल झगड़े की जड़
पुलिस परामर्श केन्द्र में महीने में औसतन डेढ़ सौ मामले आते हैं, जिसमें से 40 फीसदी मामलों में पति-पत्नी के बीच झगड़े की वजह उनके मोबाइल है। पति की शिकायत है कि पत्नी बेवजह चेटिंग में पूरा वक्त बिताती है तो पत्नी का कहना है कि पति रात के वक्त उसे समय देने की बजाए मोबाइल में ही लगा रहता है। @Patrika एक मामला तो ऐसा भी आया था कि पत्नी का किसी ओर से अफेयर है और वह रात 2 बजे के बाद अपने प्रेमी से वीडियो चैट करती है।
शादी के 6 महीने बाद ही तलाक
थाने में पहुंचने वाले आधे से ज्यादा जोड़े ऐसे हैं जिनकी शादी को 6 महीने से लेकर 2 साल ही हुए हैं और वे तलाक लेना चाहते हैं। इसके पीछे वजह सिर्फ इतनी है कि पत्नी पति के परिवार में खुद को एडजेस्ट करने समझौता नहीं करना चाहती। @Patrika पति उसे साथ रखना चाहता है लेकिन पत्नी को छुटकारा चाहिए। कई ऐसे भी मामले हैं जहां मायके का दखल ज्यादा है जिसकी वजह से ससुराल वाले ही परेशान है।
साल के शुरुआत से ही मामले
थाना प्रभारी ने बताया कि इस वर्ष साल के शुरुआत से ही दहेज के 13 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें अधिकांश में लड़के वालों पर रुपए मांगने और प्रताडऩा का आरोप है पर कुछ मामलों में लड़की वाले जबरन मामला दर्ज करने दबाव डालते हैं, इसलिए उन्हें पहले काउसिंलिंग कराई जाती है ताकि दोनों परिवार अपना-अपना पक्ष रख सकें।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट सोशल मीडिया बड़ा कारण
सोशल मीडिया में खासकर चैटिंग की दुनिया एक काल्पिनक दुनिया है,लेकिन युवा इसे सच मान बैठ लेते हैं। अपने जीवनसाथी में वे उन चीजों को देखना चाहते हैं जो रियल लाइफ में कम ही हो पाती है। @Patrika ऐसे में पति या पत्नी उस व्यक्ति की ओर खींचा चला जाता है, जो उन्हें उनकी वर्चुअल वल्र्ड के करीब ले जाता है और यही उनके झगड़े का कारण बन जाता है।
अंजना श्रीवास्तव ,काउंसिलर पुलिस परामर्श केन्द्र सेक्टर 6
समझौता नहीं चाहती लड़कियां
परिवार परामर्श केन्द्र तक पहुंचने वाले मामलों में 60 फीसदी ऐसी लड़कियां है जो ससुराल में एडजेस्टमेंट करना ही नहीं चाहती। उन्हें रिश्तों के ताने-बाने से दूर अपनी आजाद दुनिया चाहिए, जहां वह केवल अपने पति के साथ रह सकें। @Patrika हालांकि कुछ मामलों में लड़कियां ज्यादा प्रताडि़त है जिसमें बड़ी वजह प्रॉपटी या रुपए की डिमांड है।
प्रभा गुप्ता, काउंसिलर, पुलिस परामर्श केन्द्र सेक्टर 6
जो समझे उनका घर जुड़ा
थाने में पिछले वर्ष 14 सौ से ज्यादा मामले आए थे। जिसमें साढ़े पांच सौ से ज्यादा परिवारों को काउंसिलिंग टीम ने जोड़ा।@Patrika इनमें कई ऐसे थे जिसमें झगड़े का कारण वाट्सऐप और फेसबुक था,लेकिन जो नहीं समझे उन्हें मजबूरन कोर्ट भेजा गया ताकि वे आपसी सहमति से निर्णय ले सकें।
सी.तिर्की, थाना प्रभारी, महिला थाना भिलाई
फाइल फैक्ट
2018 में दहेज के 27 मामले दर्ज
2017 में दहेज के 18 मामले दर्ज
2018 में 1455 प्रकरण आए
599 परिवार काउंसिलिंग के बाद एक हुए
300 करीब जोड़े सहमति से तलाक लेने कोर्ट गए
529 जोड़े की काउंसिलिंग जारी है
Published on:
17 Feb 2019 11:35 am
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