
फर्जीवाड़ा: नर-नारी धान के नाम पर बीज कंपनी ने 40 गांव के किसानों को ठगा, नुकसान हुआ तो मुआवजे पर टालमटोल
बीरेन्द्र शर्मा@भिलाई. दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक के 40 गांवों के 250 किसान बीज उत्पादन करने वाली बायर सीड प्रोडक्शन कंपनी के झांसे में आकर बुरे फंस गए हैं। कंपनी के कहे अनुसार और उनके ही विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में इन किसानों ने करीब 1200 एकड़ में हाइब्रिड धान नर- नारी (Paddy male and female ) की खेती की। शुरुआत में फसल अच्छी रही। भरपूर बालियां भी निकलीं। जब कटाई की पारी आई तो देखा बालियों में दाने ही नहीं पड़े। प्रति एकड़ 10 से 15 क्विंटल उत्पादन होने वाला यह धान बमुश्किल 2-3 क्विंटल हो रहा है। ऐसे में किसानों की सारी मेहनत पर पानी फिर गया है। करार पर बीज की खेती कराने वाली कंपनी अब इन किसानों से बीज खरीदने में रुचि नहीं ले रही है। किसानों को हुई क्षति का मुआवजा देने में टालमटोल कर रही है।
बीज कंपनी ने किया था एग्रीमेंट
बायर सीड प्रोडक्शन कंपनी के एजेंट धमधा ब्लॉक के राहटादाह, गोबरा, गोता, माटरा, बिरोदा, खजरी, दारगांव, सोंढ, दानीकोकड़ी, टठिया, सीली, परसुली, नंदवाय, बोरी, जाताघर्रा, मोतिनपुर, मोहलाई, परसबोड़ समेत आसपास के अन्य गांवों में जा-जाकर किसानों को गर्मी की फसल में नर-नारी धान की खेती के लिए प्रोत्साहित किए थे। इसके लिए कंपनी ने किसानों से एग्रीमेंट भी किया था। इसके मुताबिक बीज, खाद व दवाई कंपनी उपलब्ध करवाती है। किसानों की अपनी जमीन पर खेती करते हुए देखरेख करना होता है। प्रति एकड़ में 20-25 हजार रुपए लागत आती है। कंपनी प्रति क्विंटल 6500 रुपए की दर से धान का यह बीज खरीद लेती है।
कंपनी एजेंट ने ऐसे लिया झांसे में
बीज कंपनी के एजेंट गांव-गांव जाकर किसानों को समझाते हैं कि उनके कहे अनुसार खेती में ज्यादा मुनाफा है। गर्मी फसल के सामान्य धान जहां बमुश्किल 1200-1500 रुपए प्रति क्विंटल बिकता है वहीं कंपनी बीज, खाद सब देगी और खुद 6500 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदेगी। किसान झांसे में आ गए और ख्ेाती करने राजी हो गए। कई किसानों ने तो 20-20 एकड़ में नर-नारी किस्म की धान की खेती इस बार की थी। अब वे ठगे से रहे गए हैं।
ऐसे होती है नर-नारी धान की खेती
गर्मी फसल (रबी के मौसम) में खेती की जाती है। कंपनी ने किसानों को नर-नारी धान की दो किस्म के बीज बोआई के लिए दिया था। नर धान को एक कतार में और नारी धान को तीन से चार कतार में लगाया जाता है। जब धान में गर्भ का समय आता है तो प्रजनन की प्रक्रिया कराई जाती है। इसके लिए 15 दिनों तक प्रतिदिन धान को हिलाना पड़ता है। इसकी मजदूरी का भुगतान किसान करता है।
किसानों का दर्द- मती मारी गई थी जो कंपनी के झांसे में आए गए
20 एकड़ में उगाया था, बालियों में दाने ही नहीं
रहटादाह के किसान सरपंच भूषण सिंह ने बताया कि उन्हें समझाया गया था कि नर-नारी धान की फसल विदेशी तकनीक से उन्नत खेती है। बायर कंपनी के कहने पर उन्होंने 20 एकड़ में खेती की। नारी धान में बालियां तो आई है, लेकिन उसमें दाने नहीं है। अब कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि पहले कटाई कर लीजिए। उसके बाद नुकसान के मुआवजे का सोचेंगे।
एक एकड़ में तीन किलो पैदावारी हुई
रहटादाह के किसान मुकुतराम मरकाम ने बताया कि पहली बार 6 एकड़ में खेती की। कंपनी की देखरेख में फसल लगाई थी। इस बार नारी धान की फसल में बीज नहीं पड़ा। प्रति एकड़ दो से तीन किलो ही पैदावारी हो रही है। कंपनी एजेंट विरेन्द्र निषाद अधिकारियों को लेकर आए थे। खेतों का निरीक्षण किए। अब मुआवजा पर स्पष्ट नहीं बता रहा है।
6 एकड़ में 6 क्विंटल हो जाए तो बहुत है
गोता गांव निवासी शशि प्रकाश ने बताया कि पहली बार में ही छह एकड़ में खेती की है। मुश्किल से 6 क्विंटल हो जाए तो बड़ी बात है। नारी धान की एक बाली में तीन बीज निकला। कंपनी ठोस आश्वासन नहीं दे रही है। मेरी तो पूरी आमदनी ही रुक गई।
कंपनी देगी मुआवजा
कृषि मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन रविन्द्र चौबे ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बायर सीड प्रोडक्शन कंपनी केवल धमधा में खेती नहीं करती। यह धमतरी, जांजगीर जिले में सीड प्रोडेक्शन कार्यक्रम की अनुमति लेता है। एक बड़ी कंपनी है, इंश्योरेंस किया होगा। अभी क्रॉप कटिंग शुरु नहीं हुई होगी। फिलहाल गांव में विभागीय अधिकारियों को भेजकर जांच करवाता हूं। किसानों का नुकसान हुआ है तो कंपनी मुआवजा देगी।
किसानों से चर्चा के बाद प्रति एकड़ राशि तय होगी
अमित देशमुख, एरिया मैनेजर बायर सीड प्रोडक्शन कंपनी ने बताया कि दो अलग-अलग किस्म का धान है। एक नर और दूसरा नारी है। जब नर के परागण नारी में जाता है तो पैदावार होती है। लॉकडाउन की वजह से मजदूर नहीं मिल पाने के कारण इस बार पॉलिनेशन नहीं करा पाए, इससे पैदावारी नहीं हुई है। कंपनी किसानों को मुआवजा देगी। किसानों के साथ कंपनी के जोनल मैनेजर बैठेंगे। चर्चा के बाद प्रति एकड़ राशि तय होगी।
किसानों का नुकसान नहीं होने देंगे
विरेन्द्र निषाद, सुपरवाइजर बायर सीड प्रोडक्शन कंपनी ने कहा कि इस बार मौसम की वजह से धान का पैदावार कम हुआ है। कंपनी मुआवाजा देगी। पिछले वर्ष भी 3-4 किसानों के खेत में पैदावार कम हुआ था तो 25 हजार रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया गया था। इस बार कंपनी अधिक मुआवजा दे सकती है।
Published on:
22 May 2021 05:03 pm
बड़ी खबरें
View Allभिलाई
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
