4 अप्रैल 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

#CG धरोहर 2 : छत्तीसगढ़ के इस मंदिर में एकसाथ होते हैं सात देवियों के दर्शन : Video

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला मुख्यालय में सिविल लाइन कसारीडीह में देवी मां सतरुपा शीतला मंदिर स्थित है। यहां पर देवी स्वयंभू प्रगट हुई है। इस मदिर की विशेषता यह है कि यहां पर एकसाथ सात देवियों के दर्शन का पुण्य लाभ मिलता है।

2 min read
Google source verification
Durg patrika

#CG धरोहर 2: छत्तीसगढ़ के इस मंदिर में एकसाथ होते हैं सात देवियों के दर्शन

दुर्ग@Patrika. छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला मुख्यालय में सिविल लाइन कसारीडीह में देवी मां सतरुपा शीतला मंदिर स्थित है। यहां पर देवी स्वयंभू प्रगट हुई है। इस मदिर की विशेषता यह है कि यहां पर एकसाथ सात देवियों के दर्शन का पुण्य लाभ मिलता है। इसी मान्यता के कारण यहां पर दोनों नवरात्रि चैत्र और क्वांर में श्रद्धालओं की भीड़ उमड़ती है। नवरात्रि पर्व पर एक मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलन से संख्या बढ़ हजारों में पहुंच गई है। यहां पर सिर्फ शहर या छत्तीसगढ़ के ही श्रद्धालु नहीं बल्कि विदेश में रह रहे भारतवंशी भी मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करवाते हैं।

छोटी और बड़ी माता की तकलीफ हो जाती दूर
ऐसी मान्यता है कि इस शीतला मंदिर में जल चढ़ाने से छोटी और बड़ी माता (चिकन पाक्स) की तकलीफ दूर हो जाती है। इससे पीडित लोग बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ देली शीतला पर जल चढ़ाते हैं। @Patrika जल चढ़ाने के बाद चिकन पाक्स की शिकायत दूर हो जाती है।

तालाब सूख जाता है लेकिन कुंड नहीं
मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस कुंड की विशेषता और मान्यता है यह कि भीषण गर्मी पडऩे पर भले ही तालाब का पानी सुख जाता हो किंतु कुंड का पानी कभी नहीं सूखता है। ऐसा कई बार हो चुका है।

पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना

मां सतरुपा शीतला मंदिर प्रदेश का पहला ऐसा देवी मंदिर है, जहां माता के सात रुपों के दर्शन होते है। जिसकी वजह से इस मंदिर से श्रद्धालुओं की अटूट आस्था जुड़ी हुई है। इस आस्था का आकलन मंदिर में बढ़ती ज्योति कलश स्थापना की संख्या से लगाया जा सकता है। @Patrika समय के साथ मंदिर समिति ने मंदिर के स्वरुप व श्रद्धालुओं के सुविधाओं में वृद्धि की है। जिससे मंदिर अब भव्य आकार ले चुका है। फलस्वरुप चैत्र व शारदीय नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ से मंदिर में मेला का माहौल निर्मित होता है। मंदिर समिति की योजना तालाब को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की है।