
निगम और सरकार से हो गई बहुत लिखा-पढ़ी, सीआरपीएफ ने नेहरू नगर की जमीन पर तंबू तान जताया हक
भिलाई. भिलाई के बहुचर्चित और पाश कॉलोनी नेहरू नगर में स्थित अरबों की जमीन पर 36 साल बाद केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) ने अपना आधिपत्य ले लिया है। इस कड़ी में (सीआरपीएफ) ने नेहरू नगर में रिक्त भूमि पर तंबू लगाकर अपना हक जताया है। इस मामले को लेकर सीआरपीएफ के साथ विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) के कार्यकाल से लेकर नगर निगम और राज्य सरकार के राजस्व विभाग से बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो सकती है।
जमीन का मामला अविभाजित मध्यप्रदेश के समय का
बता दें कि आज से लगभग चार दशक पहले 1972 में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) ने भिलाई नेहरू नगर से अपना कैंप समेट लिया था। इसके बाद भिलाई विकास प्राधिकरण साडा ने उस जमीन पर अपना मालिकाना हक बता एवं खसरा नंबर को परिवर्तित कर आवंटन कर कालोनी बसा दिया। बड़े अस्पताल और व्यवसायिक कॉम्पलेक्स, होटल आदि खुल गए हैं। साडा के बाद नगर पालिक निगम भी उसी खसरे नंबर के आधार पर उस भूमि को अपना मानकर चल रहा है। जमीन का मामला अविभाजित मध्यप्रदेश के समय का है।
नेहरू नगर, स्टील कॉलोनी, भारत माता गार्डन को भी आधिपत्य में लेने की तैयारी
राज्य विभाजन के बाद मंत्रालय और सचिवालय में लंबित रहा। जमीन कब्जा का संज्ञान होने पर सीआरपीएफ ने कई बार लिखा-पढ़ी की। अंत में खाली भूमि अपने आधिपत्य में लिया है। जवानों की कंपनी आने के बाद नेहरू नगर, स्टील कॉलोनी, भारत माता गार्डन, कब्रस्तिान के आसपास खाली जमीन को भी आधिपत्य में लेने की तैयारी की जा रही है।
साडा ने सीआरपीएफ की जमीन को भी आवंटित कर दिया
सीआरपीएफ ने बीएसपी से राजस्व मंडल आमदी नगर,पटवारी हल्का नंबर-22 के विभिन्न खसरा नंबर की 232 एकड़ जमीन क्रय की थी। इसकी राशि का भुगतान भी कर दिया था। बीएसपी ने सीआरपीएफ को जमीन हैंडओवर भी कर दिया था। जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया बाकी थी। इस बीच सीआरपीएफ की कंपनी भिलाई आई। कुछ दिनों तक रही। इसके बाद जवान वापस चले गए। बाद में इसी जमीन का कुछ हिस्सा साडा को ट्रांसफर किया गया, लेकिन साडा ने सीआरपीएफ की जमीन को भी आवंटित कर दिया।
Published on:
12 Oct 2018 11:38 am
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