
आंवले के पेड़ को महिलाओं ने बांधा कच्चा सूत और किया भोजन, मांगी परिवार की अच्छी सेहत
भिलाई . पहले आंवले के पेड़ पर कच्चा सूत लपेटा और फिर पूजा कर परिवार के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की। शनिवार को आंवला नवमीं पर शहर के गार्डन से लेकर मंदिर परिसर गुलजार रहे। लोगों ने भगवान विष्णु की आराधाना की और आंवले के पेड़ की छांव में भोजन किया। शहर के गार्डन और मंदिर जहां आंवले के पेड़ है। वहां सुबह से ही पूजा करने वालों की की भीड़ लगी रही। जिससे सभी जगह पिकनिक का माहौल था। आंवला नवमीं जिसे अक्षय नवमीं भी कहा जाता है, इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा कर उसमें कच्चा सूत लपेट कर वृक्ष की पूजा की जाती है।
मान्यता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है और कार्तिक मास की नवमीं को आंवले के वृक्ष की पूजा करने से सुख समृद्धि के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य का भी वरदान मिलता है। वैज्ञानिक नजरिए से भी आंवले को बेहतर औषधि भी माना गया है। आयुर्वेद में आंवले को एक बेहतर औषधि माना गया और इसमें विटानिन सी सबसे अधिक मात्रा में मिलता है जो पाचन के साथ-साथ सेहत के लिए अच्छा माना जाता है। सभी ने मिलकर एक साथ भोजन किया।
पार्क में सुबह से पिकनिक का माहौल
आंवला नवमीं पर शहर के गार्डन में सुबह से ही पिकनिक का माहौल रहा। मैत्री गार्डन, सेक्टर 1 पार्क, सुनीति उद्यान, मानव सेवा परिसर सहित दुर्ग के राजेन्द्र पार्क, अन्य कई स्थानों में महिलाओं और बच्चों की खासी भीड़ रही। वीकेंड होने की वजह से ज्यादा भीड़ रही। राजेन्द्र पार्क में भी दोपहर बाद काफी भीड़ रही। लोग घरों से भोजन बनाकर वहां पहुंचे।
त्योहार देते हैं आपस में जुड़कर रहने का संदेश
महिलाओं ने बताया कि हमारे व्रत और त्योहार जुड़कर रहने का संदेश देते हैं। आंवला नवमीं भी कुछ ऐसी ही है। पेड़ के नीचे भोजन करने की यह परंपरा हमें अपने पास पड़ोस, रिश्तेदारों के संग मिलकर भोजन करना सिखाती है। सेक्टर 1 की सुनीता गुप्ता ने कहा कि इस दौर में लोग वैसे ही इतने व्यस्त होते हैं और अपने पड़ोसी तक के पास बैठने का वक्त नहीं मिल पाता, पर आंवला नवमीं का त्योहार ऐसा है कि यह घर में नहीं मनाया जाता और हम अपनों के साथ समय बिताने का वक्त मिल जाता है।
Published on:
18 Nov 2018 12:23 am
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