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स्मार्ट स्कूल के प्रोजेक्ट में शामिल भवन का छज्जा गिरने से राजनीति गरमाई, पढ़ें खबर

रिसाली स्कूल का छज्जा गिरते ही स्थानीय स्तर पर राजनीति गरमा गई है। नगर निगम भिलाई में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया हैै।

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Bhilai corporation

भिलाई. शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल रिसाली का छज्जा गिरते ही स्थानीय स्तर पर राजनीति गरमा गई है। शहर सरकार नगर पालिक निगम भिलाई में आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया हैै। एक ओर जहां कांग्रेस ने इसके लिए शासन और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है वहीं भाजपा ने कांग्रेस के महापौर पर ठीकरा फोड़ा है। घटना के लिए महापौर देवेन्द्र यादव ने जिला प्रशासन और शासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है वहीं, विपक्षी दल भाजपा पार्षदों ने शहर सरकार के खिलाफ निगम मुख्यालय के सामने धरना प्रदर्शन कर जमकर विरोध जताया।

देखती रही पुलिस और जल गया महापौर का पुतला
प्रदर्शनकारियों ने शहर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हाथों में तख्ती लेकर निगम के मुख्यालय के बाहर सर्विस रोड पर विरोध प्रदर्शन किया। विरोध प्रदर्शन के बाद पुतले को आग के हवाले कर दिया। पुलिस के सामने पुतला जल गया और मौके पर तैनात जवान मूकदर्शक बने रहे। पुतला पूरी तरह जल गया तब सुपेला थाना प्रभारी की नजर पड़ी। उन्होंने जवानों को तत्काल बुझाने के निर्देश दिए। इसके बाद बाल्टी से पानी लाकर आग को बुझाया गया।

स्मार्ट स्कूल के प्रोजेक्ट में शामिल
प्रदर्शनकारी भाजपा पार्षदों पीयूष मिश्रा, परमजीत सिंह लाडी, भोजराज सिन्हा, मनोज यादव, श्रीनिवास राव, रश्मि सिंह, गायत्री यादव ने कहा कि रिसाली के जिस शासकीय स्कूल का छज्जा गिरा है। उसे महापौर ने स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट में शामिल किया है। स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट के तहत शिक्षा उपकर की राशि को भवन की रिपेयरिंग के नाम पर खर्च किया जा रहा है। निगम ने भवन को डिसमेंटल के बदले रिपेयरिंग पर ही लाखों खर्च कर दिया। इस घटना से बीएड की दो छात्राओं को गंभीर चोट आई है।

सत्तापक्ष ने यह कहा
इधर सत्तापक्ष के एमआईसी (शिक्षा विभाग)प्रभारी केशव बंछोर ने कहा कि स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट के तहत निगम क्षेत्र में संचालित शासकीय स्कूलों का सर्वे कराया था। जिसमें रिसाली के शासकीय स्कूल के अलावा वृंदा नगर, कोसा नगर, घासीदास नगर, मॉडल टाउन, खुर्सीपार सहित अन्य स्कूल भवन जर्जर पाया गया। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जर्जर भवनों को डिसमेंटल कराने के लिए जिला शिक्षा विभाग, एसडीएम और कलक्टर जनदर्शन में आवेदन दिए थे। इसके अलावा महापौर देवेन्द्र यादव ने तात्कालीन कलक्टर आर शंगीता को दो बार पत्र भी लिखा। शासन से जर्जर स्कूल भवन को डिसमेंटल कराने की अनुमति नहीं मिली। इसलिए छज्जा गिरने के लिए शासन और प्रशासन जिम्मेदार है।
निगम के पूर्व सभापति राजेन्द्र सिंह अरोरा सहित कांग्रेस पार्षदों पार्षद दिवाकर भारती, रिंकू राजेश प्रसाद, चुम्मन देशमुख, चंद्रभान सिंह ने जर्जर स्कूल भवन को डिसमेंटल कराने की अनुमति के लिए जनदर्शन में आवेदन भी दिए थे। आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

कौन सही, कौन गलत जनता तय करे
जर्जर स्कूल भवन को डिसमेंटल कराने के मामले में कौन सही और कौन गलत है यह जनता तय करेगी। वहीं जिला एवं निगम प्रशासन को शहर के अन्य जर्जर भवनों की सुध लेनी चाहिए अन्यथा भविष्य में गंभीर दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। मासूम बच्चे मजबूरी में जर्जर भवन के नीचे बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। इससे ऐसा लगता है कि शासन भी दर्जनों बार शिकायता के बाद भी बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहा है।