22 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कौन जिम्मेदार : जिसने निगम के शिक्षकों का सर्विस बुक सात साल से अपड़ेट नहीं किया

नगर निगम की लापरवाही के कारण 352 शिक्षकों को सात साल में समयमान वेतनमान और वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिली।

3 min read
Google source verification
Bhilai corporation, Bhilai corporation education, Corporation teachers service book

भिलाई. नगर निगम की लापरवाही के कारण ३५२ शिक्षकों को सात साल में समयमान वेतनमान और वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिली। ये शिक्षक निगम क्षेत्र के स्कूलों में पदस्थ हैं। सात साल से इन शिक्षकों की सर्विस बुक ही अपडेट नहीं की गए हैं। जबकि सात साल में शिक्षकों के समयमान वेतनमान और महंगाई भत्ता के रूप में ३०० से लेकर ७०० रुपए तक बढ़ोतरी हुई है। बढ़ी हुई दर के एक-एक शिक्षाकर्मी का ६०-६० हजार रुपए बकाया है। ३५२ लोगों का सात साल में शासन से दी गई वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता, डीए सहित अन्य लाभ पर लगभग २.११ करोड़ रुपए बकाया हो गया है।

आवेदन पर सुनवाई नहीं हुई

सेवा पुस्तिक अपडेट करने देते रहे आवेदन पर सुनवाई नहीं हुई। इंक्रीमेंट का लाभ नहीं मिला तो शिक्षकों ने तात्कालीन कमिश्नर अनिल टूटेजा से शिकायत की, तब मामले का खुलासा हुआ। २०१६ में भी कई बार गुलजार वर्मा को सेवा पुस्तिका को अपडेट करने के लिए आवेदन दिया। लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं दिया।

2010 से नहीं हुए अपडेट सर्विस बुक
नियमानुसार शासन की ओर से दी जाने वाली महंगाई भत्ता, अन्य सुविधाओं को सेवा पुस्तिका में दर्ज करने के बाद लाभ दिया जाता है। सेवा पुस्तिका में हर साल अपडेट किया जाना है। समय पर दी गई वेतन वृद्धि, महंगाई भत्ता, अर्जित अवकाश, मेडिकल अवकाश को दर्ज करना है। वित्तीय वर्ष में विभागीय अधिकारी और लेखा अधिकारी को सत्यापित करना अनिवार्य है। इसके बावजूद २०१० से २०१७ तक सेवा पुस्तिका को अपडेट नहीं किया गया है।

लापरवाही के लिए निगम का शिक्षा विभाग जिम्मेदार
शासन ने निगम क्षेत्र में पदस्थ सहायक शिक्षक, शिक्षक और व्याख्याता शिक्षक (नगरीय निकाय) की सेवा पुस्तिका एवं अन्य कार्यों को सेवा पुस्तिका में दर्ज करने के लिए शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना की है। बावजूद सेवा पुस्तिका को अपडेट नहीं किया गया। विभाग की लापरवाही के कारण न केवल निगम क्षेत्र के स्कूलों में पदस्थ शिक्षकों का आर्थिक नुकसान हुआ, बल्कि समय पर सेवा पुस्तिका को अपडेट नहीं करने के कारण शासन पर करोड़ों रुपए का बकाया हो गया है।

निगम की लापरवाही शासन पर बढ़ेगा बोझ
अब एक मुश्त राशि देने पर शासन पर बोझ बढ़ेगा। सात साल में ३५२ शिक्षकों के समयमान वेतनमान, वेतनवृद्धि का लाभ नहीं मिला। शिक्षाकर्मी एरियर्स के रूप में देने की मांग करेंगे। शासन को लगभग २.११ करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ेगा। कर्मचारियों पर दबाव बढ़ेगा। पिछले सात साल के सर्विस रिकॉर्ड को अपडेट करना पड़ेगा।
शिक्षाकर्मियों को यह होगा नुकसान
शिक्षाकर्मियों को समयमान, वेतनमान नहीं मिला, शासन की ओर से समय पर दी जाने वाली वेतन वृद्धि का लाभ नहीं मिला, वेतन और भत्तों से वंचित हो गए, दुर्घटना आदि की स्थिति में संबंधित पक्ष को परेशानी हो सकती है। सेवा पुस्तिका समय पर संधारित नहीं किए जाने पर पढ़ाई प्रभावित होती है।

विधानसभा तक लेकर गए थे मामला
नगरीय निकाय शिक्षक संघ ने सेवा पुस्तिका के मामले में कई बार शिकायत व प्रदर्शन कर चुके हैं। ?िालाई सहित प्रदेश के अन्य निकायों के मामले को लेकर संघ ने जून २०१७ में विधानसभा का घेराव भी किया था। अधिकारियों की उदासीनता के कारण शिक्षकों को लाभ नहीं मिलने की बात कही गई थी। लंबे अरसे से सेवा पुस्तिका का संधारित नहीं किए जाने से नियमितीकरण, 8 वर्ष की सेवापुस्तिका पर पुनरीक्षित वेतनमान, प्राचार्य व प्रधानपाठक के रिक्त पदों पर पदोन्नति, क्रमोन्नति, स्थानांतरण, और अनुकंपा नियुक्ति प्रभावित होने की शिकायत की गईथी।

बड़ा सवाल
१. शिक्षाकर्मी संवर्ग की सेवा पुस्तिका से दूरी बनाने वाले जिम्मेदार कौन है। आखिर क्यों शिक्षा अधिकारी ने छह साल तक सेवा पुस्तिका का सत्यापन नहीं किया। क्या वजह थी कि सेवा पुस्तिका लिपिक को संधारित करने नहीं दिया। वेतन निर्धारिण आदि का उल्लेख क्यों नहीं कराया। पुस्तिका में हस्ताक्षर करने से परहेज क्यों किया?

२. शिक्षाकर्मियों के वेतन से सीपीएफ की कटौती की जा रही है, लेकिन उनके खाते में राशि जमा हो रही है या नहीं। यह भी जांच का विषय है। सीपीएफ की राशि से मिलने वाले ब्याज को लेकर भी शिक्षाकर्मियों ने शिकायतें की है।