
घोटाला (photo-unsplash)
भिलाई@सुबोध कुमार झा। BSP Scrap Scam: बीएसपी में लौह स्क्रैप की तस्करी और बड़े घोटाले का मामला अब गहराता जा रहा है। पुलिस ने मामले में आठ श्रमिकों को गिरफ्तार कर जेल तो भेज दिया, लेकिन इस संगठित अपराध के असली सूत्रधार ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर और मिलीभगत के संदिग्ध सीआईएसएफ व बीएसपी अधिकारी अभी भी जांच के दायरे से बाहर हैं।
जांच में खुलासा हुआ है कि फ्लू डस्ट के परिवहन में दो दर्जन से अधिक वाहनों का इस्तेमाल हो रहा था। इन वाहनों के जरिए डस्ट की आड़ में कीमती लौह स्क्रैप की खुलेआम चोरी की जा रही थी। कई वाहनों की नंबर प्लेट तक बदली गईं। हालांकि पुलिस ने छापेमारी के दौरान 8 वाहनों को जब्त किया है, लेकिन दो दर्जन से अधिक संदिग्ध वाहन अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर हैं।
सूत्रों के अनुसार, बीएसपी के फ्लू डस्ट परिवहन में शामिल चार संदिग्ध वाहनों के नंबर (सीजी-07-डीडी-0989, सीजी-07-0979, सीजी-07-8081 और सीजी-07-2257) अब सामने आए हैं। छापेमारी के बाद ट्रांसपोर्टरों ने इन वाहनों को अपने गोपनीय यार्डों में छिपा दिया है, लेकिन पुलिस इनकी बरामदगी के लिए ठोस पहल करती नजर नहीं आ रही है।
पूछताछ में पता चला है कि ट्रांसपोर्टर अपनी साख बचाने के लिए खुद चालकों से चोरी का माल 700 रुपए प्रतिदिन के किराये पर ली गई मशीनों के माध्यम से उतरवाते हैं। यह लोहा बाद में सिलतरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में खपाया जाता है। एएसपी सुखनंदन राठौर का कहना है कि पुलिस रिमांड में अहम सुराग मिले हैं और फुटेज के आधार पर अन्य वाहनों की भी जांच की जा रही है। बहरहाल, बड़ी मछलियों पर कार्रवाई न होने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
BSP स्क्रैप घोटाले में अब तक हुई कार्रवाई कई सवाल खड़े कर रही है। जहां एक ओर श्रमिकों की गिरफ्तारी हुई है, वहीं कथित मास्टरमाइंड, संदिग्ध ट्रांसपोर्टर और अन्य जिम्मेदार लोगों तक जांच अभी नहीं पहुंच सकी है। 15 से अधिक संदिग्ध वाहनों का अब भी लापता होना और बड़े नामों पर कार्रवाई न होना जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। ऐसे में पूरे मामले की गहन और पारदर्शी जांच ही सच्चाई सामने ला सकती है।
Published on:
08 Jun 2026 08:52 am
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