14 मई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जिंदादिल सोच ने पांच गांवों की अनपढ़ महिलाओं को बना दिया हुनरमंद, पहले लोकल ब्रांड कहकर चिढ़ाने वाले दुकानदार भी करते हैं तारीफ

भिलाई शहर के एक निजी कॉलेज में डीन के पद पर चल रही अच्छी खासी नौकरी को छोड़कर खुद को समाज के लिए समर्पित करने का हौसला दुर्ग की सिपी दुबे ने दिखाया है। इनकी सोच और महिलाओं के लिए कुछ बेहतर करने का जुनून ही है, जिसने पांच गावों की महिलाओं को रोजगार से जोड़ दिया।

2 min read
Google source verification

भिलाई

image

Shiv Singh

Jan 27, 2023

जिंदादिल सोच ने पांच गांवों की अनपढ़ महिलाओं को बना दिया हुनरमंद, पहले लोकल ब्रांड कहकर  चिढ़ाने वाले दुकानदार भी करते हैं तारीफ

सिलाई करती महिलाएं

दुर्ग . महिला आंत्रप्रेन्योर सिपी दुबे का कहना है अपनी योग्यता को पहचानकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने अपना किस्सा शेयर करते हुए बताया कि जब कंपनी शुरू की और दुकानदारों तक कपड़ों का ऑर्डर लेने गए तो व्यापारियों ने लोकल ब्रांड कह कर हमारे प्रोडक्ट को नकार दिया। यदि तब पैकअप कर लेते तो आगे नहीं बढ़ पाते। हमने इसका हल निकाला। शहर कि हर छोटी-बड़ी स्कूल से संपर्क कर उनके यूनिफार्म के ऑर्डर ले आए। हमारा काम अच्छा था, इसलिए पहले ही साल दर्जन भर से अधिक स्कूलों के हजारों बच्चों के यूनिफार्म सिले। इस पहले ऑर्डर ने साथ में जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का नया रास्ता दिखा दिया।

सिपी ने बताया कि उनके छोटे से लघु उद्योग की शुरुआत में सिर्फ चार मशीने थीं। कुछ ही वर्षों में यह संख्या 50 के पार पहुंच गई है। वर्तमान में स्कूली यूनिफार्म, कंपनियों के लिए वर्कर कास्टम जैसे प्रोजेक्ट पर काम जारी है। रोजागार से जुड़ने का इरादा रखने वाली नई महिलाआें को सिलाई वर्क सिखाने के दौरान भी पूरी पगार स्टाइपैंड के तौर पर दी जाती है।

यह महिलाएं जापान और रशिया की आधुनिक मशीनों का चलाना सीख चुकी हैं। बहुत सी महिलाएं अनपढ़ है, फिर भी ये मशीन पर दिख रहे पैटर्न को समझकर मशीन ऑपरेट कर लेती हैं। शून्य से शुरू हुई कंपनी का आज दो करोड़ रुपए का टर्नओवर है। सिपी ने बताया कि कंपनी में कार्यरत बहुत सारी सिंगल मदर के बच्चों की स्कूल फीस कंपनी भरती है, जिससे कमाई का बड़ा हिस्सा महिला घर ले जा पाती है। जिन्हें कंपनी आने में दिक्कत है, उन्हें घर से ही काम करके देने का विकल्प भी दिया गया है।

50 से अधिक महिलाएं कमा रही

आज इनकी गारमेंट फैकट्री में 50 से अधिक महिलाएं सुपर हाईटेक मशीनों से सिलाई के कामकाज से हजारों रुपए महीने के कमा रही है। गांव की इन शिक्षित और अनपढ़ दोनों तरह की महिलाएं अपनी लाइफ स्टाल को बदलने में सफल रही हैं। स्वावलंबन के साथ सिर उठाकर आगे बढ़ रही हैं।