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पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल: भीलवाड़ा में ‘वैदिक होली’ की धूम, कई स्थानों पर गोबर के कंडों से होगा होलिका दहन

वस्त्र नगरी होली पर पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश देने जा रही है। शहर में परंपरागत लकड़ी के स्थान पर 100 से अधिक स्थानों पर ‘वैदिक होलिका दहन’ किया जाएगा। इसके लिए गोशालाओं और सामाजिक संस्थाओं ने करीब 3 लाख गोबर के कंडे तैयार किए हैं। यह पहल न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि स्थानीय […]

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A unique initiative to protect the environment: Bhilwara celebrates 'Vedic Holi'; cow dung cakes will be used for Holika Dahan at many places.

A unique initiative to protect the environment: Bhilwara celebrates 'Vedic Holi'; cow dung cakes will be used for Holika Dahan at many places.

  • शुभ मुहूर्त: प्रदोष गोधूलीवेला में शाम 6.36 से रात 9 बजे तक व मध्यरात्रि बाद 01:25 से 2:37 बजे तक होलिका दहन
  • 3 लाख कंडों से महकेगी शहर की आबोहवा, गोपालकों को मिलेगा आर्थिक संबल

वस्त्र नगरी होली पर पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश देने जा रही है। शहर में परंपरागत लकड़ी के स्थान पर 100 से अधिक स्थानों पर 'वैदिक होलिका दहन' किया जाएगा। इसके लिए गोशालाओं और सामाजिक संस्थाओं ने करीब 3 लाख गोबर के कंडे तैयार किए हैं। यह पहल न केवल प्रदूषण कम करेगी, बल्कि स्थानीय गौपालकों के लिए आर्थिक संबल का जरिया भी बनेगी।

माधव गोशाला ने अकेले 3 लाख कंडे तैयार किए हैं। गौशाला से जुड़े गोविंद सोडाणी ने बताया कि करीब 60 आयोजन समितियों ने बुकिंग करवाई है। अग्रवाल समाज संपत्ति ट्रस्ट के तत्वावधान में अग्रवाल उत्सव भवन में 11 हजार कंडों से होलिका सजाई गई है। इसके अलावा सुमंगल सेवा संस्थान की ओर से भी कंडे तैयार किए गए है।

पंडित अशोक व्यास ने बताया कि 2 मार्च को होली मनाई जाएगी। जबकि 3 मार्च को धुलंडी पर्व मनाया जाएगा। साथ ही पूर्णिमा का व्रत भी सोमवार को रहेगा। क्योंकि शाम के समय पूर्णिमा रहेगी। इस वर्ष होलिका दहन के समय का विशेष ध्यान रखना होगा। श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6.36 बजे से रात 9 बजे तक रहेगा। इसके अलावा मध्यरात्रि बाद 01:25 से 2:37 बजे तक रहेगा। भाइयों की लंबी उम्र की कामना के साथ बहनें बड़बुलिए की माला अर्पित करेंगी। बड़बुलिए शहर के कई हिस्सों में 30 रुपए प्रति माला आसानी से मिल रहे है। पंडित अशोक व्यास का कहना है कि वैदिक रीति से दहन न केवल वातावरण को शुद्ध करता है, बल्कि गाय और प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता भी प्रकट करता है। इसमें कपूर, घी और हवन सामग्री का उपयोग इसे और अधिक प्रभावी बनाता है।

तीन मार्च को धुलंडी (रंगोत्सव)

शहर में 3 मार्च को पूरे शहर में हर्षोल्लास के साथ गुलाल खेली जाएगी। इसके लिए बाजार पूरी तरह से सज गए हैं। वही कुछ लोगों ने हर्बल गुलाल तैयार की है। हालांकि तीन मार्च को चंद्रग्रहण रहेगा, लेकिन इसका असर धुलंडी पर नहीं पड़ेगा। पंडित अशोक व्यास का कहना है कि चंद्रग्रहण भारत में नजर आने से सूतक काल रहेगा। यह ग्रहण शाम 6.45 से 6.47 बजे तक यानी 2 मिनट का रहेगा। ऐसे में सूतक काल सुबह 9.45 बजे से शाम 6.47 बजे तक रहेगा। इस दौरान मंदिरों के पट बंद रहेंगे। शाम को मंदिरों की सफाई के बाद पट खोले जाएंगे।