पॉजिटिव रिपोर्ट पर ही सहायता राशि, 2.26 करोड़ का भुगतान

नेगेटिव को मानेंगे कोरोना नहीं था, भले सीटी स्कोर 20-22 ही क्यों न हो
226 पीडि़त परिवारों को 2.26 करोड़ का भुगतान

By: Suresh Jain

Published: 22 Jul 2021, 08:14 AM IST

भीलवाड़ा।
कोरोना से मृत्यु के मामले में आरटीपीसीआर रिपोर्ट ही आर्थिक मदद का आधार मानी गई है। रिपोर्ट नेगेटिव होने के आधार पर कई आवेदन अटक गए। सीटी स्कैन में कोरोना संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्राइवेट अस्पतालों ने मरीजों का कोविड गाइडलाइन के अनुसार इलाज किया। इसमें कुछ लोगों की मौत हो गई। इन अस्पतालों ने मृत्यु प्रमाण पत्र में वजह भी कोरोना लिखी पर सरकार इसे अपर्याप्त मान रही है। राज्य सरकार ने कोरोना से मौत में पीडि़त परिवारों को आर्थिक सहयोग की घोषणा की और लोगों ने आवेदन किया तो यह खुलासा हुआ कि आर्थिक सहायता तभी मिलेगी, जब आरटीपीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव हो।
मिली जानकारी के अनुसार, बिन आरटीपीसीआर रिपोर्ट के आवेदनों पर विचार ही नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे आदेश हैं कि आरटीपीसीआर रिपोर्ट वाले आवेदन पर विचार कर जिला स्तरीय कमेटी के सामने रखें। जिले में सरकारी आंकड़ों के अनुसार १५६ जनों की कोरोना से मौत हुई जबकि असलियत में एमजीएच में ही कोरोना का इलाज कराने वाले ८२० जनों ने दम तोड़ दिया। इसके अलावा निजी अस्पताल, जयपुर, अजमेर, उदयपुर, अहमदाबाद, मुम्बई, चेन्नई तक भीलवाड़ा के लोगों की मौत कोरोना से हो चुकी है।
इसलिए चुने निजी अस्पताल
कोरोना की दूसरी लहर में सरकारी अस्पतालों में बेड नहीं मिलने पर मरीज निजी अस्पतालों में गए। निजी अस्पतालों ने भी सीटी स्कैन रिपोर्ट के आधार पर कोरोना गाइडलाइन के अनुसार इलाज किया। सीटी रिपोर्ट के आधार पर इलाज हुआ और जिन्होंने दम तोड़ा, उनके मृत्यु प्रमाण पत्र में भी जिक्र किया गया। अंतिम संस्कार भी कोविड गाइडलाइन के अनुसार हुआ।
स्कोर कितना भी हो
सीटी स्कैन डॉक्टर इसलिए कराते हैं ताकि पता चल सके कि कोरोना कितने प्रतिशत है और मरीज को किस दवाई की आवश्यकता है। लेकिन सरकार अपने आंकड़ों में सीटी रिपोर्ट के आधार पर कोरोना पॉजिटिव नहीं मानती। आरटीपीसीआर के बिना सीटी स्कैन कराने पर स्कोर २० से अधिक है और आरटीपीसीआर नेगेटिव है तो भी उसे कोरोना पॉजिटिव नहीं माना जा रहा है। वहीं आरटीपीसीआर सरकार कोरोना की जांच के लिए कराती है। जिले में यह जांच केवल सरकारी अस्पताल या सरकारी केन्द्रों पर ही की गई।
अब तक २५९ आवेदन
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को कोरोना मृतकों के परिजनों को सहायाता के लिए नोडल विभाग बनाया है। अब तक २५९ आवेदन मिले हंै। इसमें १४० विधवा महिला, ११० विधवा महिला के बच्चे तथा ९ आवेदन अनाथ बच्चों के आए। इनमें २२६ आवेदन स्वीकार कर २.२६ करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया। हालांकि कई लोग मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं।

Suresh Jain Reporting
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