
परिजन की गोद में मासूम बच्चा। फोटो- पत्रिका
भीलवाड़ा। शहर की कच्ची बस्ती कांवाखेड़ा स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक 14 वर्षीय छात्र को कथित तौर पर अमानवीय सजा दिए जाने का मामला सामने आया है। बीएड इंटर्नशिप कर रही एक छात्रा ने सजा के रूप में छात्र से उठक-बैठक लगवाई, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया। घटना के बाद आक्रोशित परिजन और स्थानीय लोग स्कूल पहुंच गए और हंगामा करते हुए कार्रवाई की मांग की।
छात्र की मां ने आरोप लगाया कि उनके बेटे को पहले भी सजा दी गई थी। उनका कहना है कि दो दिन पहले भी उसे करीब 100 उठक-बैठक लगवाई गई थीं और डराया गया था। सोमवार को जब वह स्कूल गया तो इंटर्न छात्रा ने फिर से उसे करीब 200 उठक-बैठक लगवाने को कहा।
इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह स्कूल में ही बेहोश हो गया। परिजनों का आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने उन्हें इसकी कोई सूचना नहीं दी और तीन अन्य बच्चे उसे घर छोड़कर गए। घर पहुंचने पर उसकी हालत गंभीर थी, वह सीढ़ियां भी नहीं चढ़ पा रहा था और रोते हुए जमीन पर घिसट रहा था। परिजनों ने बताया कि करीब 20 दिन पहले ही संस्था प्रधान के कहने पर उसे स्कूल में बैठाया जा रहा था। उन्होंने संबंधित छात्रा को हटाने की मांग की है।
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कांवाखेड़ा के प्रभारी संस्था प्रधान प्रदीप मेहता ने इन आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि स्कूल में स्टाफ की भारी कमी है और केवल तीन स्थायी कर्मचारी हैं, जिनमें से दो छुट्टी पर हैं।
उनके अनुसार बच्चों की शरारत के कारण इंटर्न छात्रा कृष्णा सुथार ने उन्हें अनुशासन के लिए उठक-बैठक लगवाई थी, लेकिन 200 की संख्या गलत है। उन्होंने कहा कि अधिकतम 50 से 60 उठक-बैठक लगवाई गई होंगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र का अभी स्कूल में औपचारिक प्रवेश नहीं हुआ है और उसे बिना नामांकन के बैठाया जा रहा है।
संस्था प्रधान प्रदीप मेहता ने बताया कि घटना के बाद इंटर्न छात्रा को सख्त चेतावनी दी गई है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि भविष्य में बच्चों के साथ इस प्रकार की सजा नहीं दी जाए और यदि कोई बच्चा अनुशासन नहीं मानता है तो उसके अभिभावकों को बुलाकर बात की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि परिजन अनावश्यक रूप से स्कूल का माहौल बिगाड़ रहे हैं।
Published on:
04 May 2026 07:53 pm
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