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परिणाम की ‘बुलेट ट्रेन’, मार्कशीट की ‘बैलगाड़ी’: नतीजे आए महीना बीता, स्कूलों से नदारद अंकतालिकाएं

1 अप्रेल से सत्र शुरू करने की हठधर्मिता ने बिगाड़ा सिस्टम; जल्दबाजी में कराईं परीक्षाएं। अब मार्कशीट के लिए परेशान हो रहे विद्यार्थी

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A bullet train of results, a bullock cart of marksheets: A month after the results were announced, marksheets remained missing from schools.

परिणाम की 'बुलेट ट्रेन', मार्कशीट की 'बैलगाड़ी': नतीजे आए महीना बीता, स्कूलों से नदारद अंकतालिकाएं

राज्य सरकार की 1 अप्रेल से नया शैक्षणिक सत्र प्रारंभ करने की 'हठधर्मिता' अब विद्यार्थियों पर भारी पड़ने लगी है। शिक्षा विभाग और बोर्ड ने नया सत्र समय पर शुरू करने की जल्दबाजी में कक्षा 10वीं और 12वीं सहित अन्य सभी अर्धवार्षिक और वार्षिक परीक्षाएं समय से काफी पहले ही करवा लीं। यही नहीं, बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम भी रेकॉर्ड समय में मार्च माह में ही घोषित कर दिए गए। लेकिन, नतीजों में जो रफ्तार दिखाई गई, वह अब अंकतालिकाओं के वितरण में पूरी तरह नदारद है।

परीक्षा परिणाम घोषित हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक प्रदेश के विद्यालयों में मूल अंकतालिकाएं (मार्कशीट) नहीं पहुंची हैं।

जल्दबाजी में बिगड़ा पूरा परीक्षा चक्र

1 अप्रेल से नया सत्र शुरू करने के दबाव में इस बार शिक्षा विभाग ने अर्धवार्षिक, वार्षिक और बोर्ड परीक्षाओं का पूरा कैलेंडर ही बदल डाला और तय समय से बहुत पहले ही परीक्षाएं संपन्न करवा दीं। कॉपियों के मूल्यांकन में भी अभूतपूर्व जल्दबाजी दिखाई गई और मार्च के महीने में ही बोर्ड के परिणाम जारी कर दिए गए, ताकि 1 अप्रेल से नया सत्र बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।

अब विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी

मार्कशीट विद्यालयों में नहीं पहुंचने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी छात्र-छात्राओं को उठानी पड़ रही है। परिणाम तो पता चल गया है, लेकिन अपने ही दस्तावेजों के लिए उन्हें भटकना पड़ रहा है। अगली कक्षाओं में स्थायी प्रवेश या अन्यत्र दाखिले के लिए मूल अंकतालिका की आवश्यकता होती है। इंटरनेट से निकाली गई अंकतालिका की प्रति हर जगह प्रमाणित नहीं मानी जाती, इससे विद्यार्थियों और अभिभावकों में असमंजस का माहौल है। हालांकि इंटरनेट से निकाली गई अंकतालिका से अगली क्लास में प्रवेश या टीसी काटी जा रही है।

अब हर साल होगी 'संस्कृतवाङ्मय सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता

शिक्षा विभाग ने जारी किए निर्देश, अक्टूबर के पहले सप्ताह में होगा आयोजन; विजेताओं को मिलेगा सम्मान

प्रदेश के सामान्य शिक्षा विभाग में अब राज्य स्तर पर प्रतिवर्ष संस्कृत वाङ्मय सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सत्र 2026-27 के लिए इसके सफल एवं सुचारू आयोजन के लिए निर्देश जारी किए हैं।

दो वर्गों में होगी प्रतियोगिता, कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थी लेंगे हिस्सा

यह राज्य स्तरीय प्रतियोगिता इण्डिया बुक ऑफ रेकॉर्ड्स में नामित संस्था निम्बार्क वैदिक संस्कृत समिति भीलवाड़ा के सुनियोजित मार्गदर्शन में आयोजित करवाई जाएगी। विद्यार्थियों की सहभागिता के लिए प्रतियोगिता को दो वर्गों में बांटा गया है। कनिष्ठ वर्ग में कक्षा 6 से 8 तक तथा वरिष्ठ वर्ग में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थी सम्मिलित होंगे।

अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में होगा मुख्य आयोजन

माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से समस्त संयुक्त निदेशकों और जिला शिक्षा अधिकारियों को माह अक्टूबर 2026 के प्रथम सप्ताह में इस प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए अपने क्षेत्राधिकार में दिशा-निर्देश प्रदान करने के आदेश दिए गए हैं। विभाग ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रतियोगिता का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि अधिकाधिक विद्यार्थियों, शिक्षकों और विभागीय अधिकारियों की इसमें भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

प्रतिभागियों के लिए भोजन व आवास रहेगा निःशुल्क

निम्बार्क वैदिक संस्कृत समिति भीलवाड़ा के प्रदेशाध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद शर्मा के प्रस्ताव के आधार पर शिक्षा मंत्री कार्यालय और शासन सचिवालय ने इस संबंध में कार्यवाही की है। कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले सभी छात्र-छात्राओं एवं आगंतुकों के आवास और भोजन की पूरी व्यवस्था समिति की ओर से पूर्णतःनिःशुल्क की जाएगी। प्रतियोगिता में जिला, मण्डल एवं राज्य स्तर पर वरीयता प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा।