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यूआईटी में नियुक्तियों पर बवाल: नियमों को ताक पर रख कलक्टर ने किए कर्मचारियों के पदस्थापन

पंचायती राज और अन्य विभागों के कर्मियों को अवैध रूप से न्यास में लगाने का आरोप, चार कर्मचारियों को न्यास में नियुक्त कर दिया

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UIT recruitment uproar: Collector disregards rules and appoints employees

यूआईटी में नियुक्तियों पर बवाल: नियमों को ताक पर रख कलक्टर ने किए कर्मचारियों के पदस्थापन

भीलवाड़ा नगर विकास न्यास भीलवाड़ा में नियमों के विरुद्ध जाकर अन्य विभागों के कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति और कार्य व्यवस्थार्थ लगाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस मामले में सीधे तौर पर जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू पर अनधिकृत रूप से आदेश जारी करने के आरोप लगे हैं। आजाद नगर निवासी नारायणलाल ने जिला कलक्टर को पत्र लिखकर इन नियुक्तियों को तुरंत रद्द करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि दस दिन में आदेश वापस नहीं लिए गए, तो वे केंद्र व राज्य सरकार तथा राष्ट्रपति से इसकी शिकायत करेंगे।

बिना अधिकार के चार कर्मचारियों की यूआईटी में एंट्री

शिकायतकर्ता के अनुसार कलक्टर ने अपने अधिकारों से बाहर जाकर नियम विरुद्ध तरीके से चार कर्मचारियों को न्यास में नियुक्त कर दिया। इनमें नरेश खटीक, कुलदीप जैन, बलवीर बड़गुर्जर और लालचंद बलाई शामिल हैं। शिकायत में कहा गया है कि इन नियुक्तियों के लिए कलक्टर सक्षम और अधिकृत अधिकारी नहीं हैं। आरोप यह भी है कि लगातार एक-एक कर अन्य विभागों के कर्मचारियों को न्यास में लगाया जा रहा है, जो वहां जाकर भ्रष्टाचार में लिप्त हो रहे हैं।

तबादलों पर रोक के बावजूद पंचायती राज कर्मी को भेजा यूआईटी

पत्र में बताया गया कि बलवीर बड़गुर्जर जो पंचायती राज सेवा के कार्मिक हैं और डेपुटेशन पर जिला परिषद में कार्यरत थे। राज्य सरकार की ओर से कर्मचारियों के स्थानांतरण और डेपुटेशन पर रोक लगा रखी है और न्यास के नियमों के तहत पंचायती राज के कर्मचारी न्यास सेवा में नहीं लगाए जा सकते। इस आरोप की पुष्टि जिला कलक्टर कार्यालय की ओर से 3 नवम्बर 2025 को जारी एक आदेश से होती है। इस आदेश में कलक्टर संधू ने पंचायत समिति सुवाणा के कनिष्ठ सहायक बड़गुर्जर को जो जिला परिषद में कार्यरत थे, तत्काल कार्यमुक्त कर नगर विकास न्यास में उपस्थिति देने के निर्देश दिए हैं।

अन्य विभागों से भी मनमानी नियुक्तियां

न्यास में आईए का कोई पद ही नहीं है, इसके बावजूद नरेश खटीक को नियम विरुद्ध तरीके से वहां कार्य व्यवस्थार्थ लगाया। परिवहन विभाग में कार्यरत एएओ सत्यनारायण बलाई को न्यास का अतिरिक्त कार्य सौंप दिया गया। इस आदेश का अनुमोदन निदेशालय कोष एवं लेखा विभाग की ओर से नहीं किया गया था, फिर भी बलाई न्यास में कार्य करते रहे। नारायण ने कलक्टर के इन कृत्यों को नियमों का खुला उल्लंघन बताया है।