
42 डिग्री की तपन में 'नीट' : अंदर डॉक्टर बनने की जद्दोजहद, बाहर अभिभावकों की 'अग्निपरीक्षा'
देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट यूजी- 2026) रविवार को तपती धूप और कड़े पहरे के बीच संपन्न हो गई। भीलवाड़ा के पांच केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में जहां भविष्य के डॉक्टरों ने बंद कमरों में कठिन सवालों से जंग लड़ी, वहीं परीक्षा केंद्रों के बाहर उनके अभिभावक 42 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच धैर्य की परीक्षा देते नजर आए। राजेंद्र मार्ग स्कूल सहित शहर के सभी पांचों परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा के बेहद कड़े इंतजाम रहे। परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5:20 बजे तक आयोजित की गई, लेकिन केंद्रों पर सुबह 11 बजे से ही परीक्षार्थियों की सघन चेकिंग का दौर शुरू हो गया था।
नकल और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की गाइडलाइन के अनुसार केंद्रों पर त्रि-स्तरीय जांच की गई। परीक्षार्थियों को मेटल डिटेक्टर से गुजरने और बायोमेट्रिक हाजिरी के बाद ही भीतर प्रवेश दिया गया। इस बार भी ड्रेस कोड को लेकर प्रशासन की ओर से खासी सख्ती बरती गई। पूरी बांह की शर्ट, जूते और आभूषण पहनकर आए परीक्षार्थियों को उन्हें बाहर ही उतारना पड़ा। निर्धारित समय दोपहर ठीक 1:30 बजे केंद्रों के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए, जिसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश नहीं दिया गया।
परीक्षा के दौरान आसमान से बरसती आग ने सबसे ज्यादा परेशान परीक्षार्थियों के साथ आए परिजनों को किया। दोपहर 2 बजे से 5:20 बजे तक जब बच्चे अंदर ओएमआर शीट काली कर रहे थे, तब बाहर अभिभावक 42 डिग्री के तापमान में पसीने से तर-बतर होकर पेड़ों और टेंट की छांव तलाशते दिखे। कई अभिभावक दूर-दराज के गांवों से अपने बच्चों को लेकर पहुंचे थे। भीलवाड़ा के 5 केंद्रों पर 2159 अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा, सघन जांच और ड्रेस कोड को लेकर रही सख्ती। परीक्षा के दौरान कडी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इसके लिए पुुलिस के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।
एक नजर में नीटयूजी 2026
Updated on:
04 May 2026 08:52 am
Published on:
04 May 2026 08:52 am
