
धर्म-कर्म का श्रेष्ठ 'पुरुषोत्तम मास': ज्येष्ठ में इस बार 8 मंगलवार का दुर्लभ संयोग
भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में पुरुषोत्तम मास को धर्म-कर्म, पूजा-पाठ और पुण्य प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ माह माना गया है। इस वर्ष दो ज्येष्ठ माह होने के कारण एक अत्यंत दुर्लभ और पवित्र संयोग बन रहा है। ज्येष्ठ माह में कुल 8 मंगलवार आएंगे, वहीं भगवान सूर्यनारायण भी अपने पूर्ण यौवन पर होंगे। शास्त्रों की गणना के अनुसार, इस पवित्र अधिक मास में हनुमानजी और प्रभु श्रीराम की आराधना विशेष फलदायी मानी गई है।
ज्येष्ठ माह: 2 मई से आरंभ हो चुका है, जो 29 जून (पूर्णिमा) के दिन पूर्ण होगा। अधिक मास: 17 मई से आरंभ होगा और 15 जून सोमवती अमावस्या)के दिन इसका समापन होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान श्रीराम को वनवास हुआ था, तब उनकी और भक्त हनुमान की पहली भेंट इसी ज्येष्ठ अधिक मास में मंगलवार के दिन ही हुई थी। यही कारण है कि इस पूरे माह में हनुमानजी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है।
प्रभु श्रीराम और बालाजी की विशेष कृपा पाने तथा मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए श्रद्धालुओं को इस माह में ये धार्मिक कार्य करने चाहिए। हनुमानजी को चोला चढ़ाना और तैलाभिषेक करना। हनुमान चालीसा, हनुमानाष्टक, बजरंग बाण और वाल्मीकि सुंदरकांड का पाठ। भगवान का विशेष शृंगार करना। केला, फल और गुड़-चने का प्रसाद अर्पित कर उसका वितरण करना।
पंडित अशोक व्यास ने इस माह की महिमा बताते हुए कहा कि महाभारत काल में महाबली भीम का अहंकार भी हनुमानजी ने इसी माह में नष्ट किया था। इसलिए इस पूरे महीने में अहंकार और बुराइयों का त्याग कर ईश्वर की भक्ति में लीन होना चाहिए।
पंडित व्यास के अनुसार पुरुषोत्तम मास में इन कार्यों को करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। भागवत कथा, राम कथा और शिव महापुराण का श्रवण व वाचन। भगवान का कीर्तन और भजन। पवित्र नदियों या समुद्र में स्नान। ब्राह्मणों को दक्षिणा और दान देना। 17 मई से शुरू होगा अधिक मास, बजरंगबली की आराधना और पुण्य प्राप्ति का है सर्वश्रेष्ठ अवसर मिलेगा।
Updated on:
5 May 2026, 8:41 AM IST
Published on:
5 May 2026, 8:41 AM IST
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