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अमरतिया की स्कूल बनी खतरे का केंद्र, हादसे को दावत

- स्कूल भवन समस्या बनी अभिशाप, 150 बच्चों की जान पर मंडरा रहा खतरा

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Amartia's school becomes a centre of danger, inviting accidents

Amartia's school becomes a centre of danger, inviting accidents

भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी क्षेत्र के अमरतिया गांव की स्कूल भी जर्जर है। यहां हादसा हो सकता है। बारिश के समय तो कुछ कक्षाओं की छुट्टी करनी पड़ती है तो कुछ छात्रों को एक साथ टीन शेड के नीचे बैठाना पड़ता है। अधिकारी इस गांव में आते तक नहीं है, क्योंकि गांव बनास नदी के किनारे पर बसा हुआ हैं यहां सीधा रोड नहीं है।

तीन कमरों में ठूंसे जा रहे हैं 150 मासूम छात्र

प्राथमिक स्कूल वर्षो पुरानी है, जहां गांव की पांच पीढ़ियां शिक्षा प्राप्त कर चुकी हैं। आज भी यहां करीब 150 बच्चे अध्ययनरत हैं, लेकिन स्कूल भवन में केवल तीन कमरे ही उपलब्ध हैं। प्रधानाध्यापक भेरूलाल गर्ग ने बताया कि शीतकाल, ग्रीष्मकाल या वर्षा, हर मौसम में बच्चों को बैठने तक की जगह नहीं मिलती। कई बार तो बच्चों को खड़े रहने तक की जगह नहीं होती। पास ही बसे अमरतिया का खेड़ा में स्थित स्कूल में करीब 50 बच्चों का नामांकन है। लेकिन स्कूल का भवन इतनी बुरी हालत में है कि वह किसी भी समय गिर सकता है। ग्रामीणों के अनुसार, बच्चों की जान जोखिम में है और किसी भी क्षण कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों की मांग है कि अमरतिया और खेड़ा स्कूल को एकीकृत करते हुए एक ही सुरक्षित स्थान पर नया स्कूल भवन बनाया जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।