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खनिज संपदा की सुरक्षा के लिए अभेद्य कवच: खनन का डिजिटल पहरा

प्रदेश के बेशकीमती खनिजों की चोरी रोकने और राजस्व को सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने मिशन मोड पर तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। खान विभाग ने पहले चरण में बड़े स्टेक होल्डर्स के 10 तुलाई कांटों (वे-ब्रिज) को पूरी तरह ऑटोमेटेड कर दिया है। इसके साथ ही खनिज परिवहन में […]

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An impenetrable shield to protect mineral wealth: Digital Mining Guard

An impenetrable shield to protect mineral wealth: Digital Mining Guard

प्रदेश के बेशकीमती खनिजों की चोरी रोकने और राजस्व को सुरक्षित करने के लिए राज्य सरकार ने मिशन मोड पर तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। खान विभाग ने पहले चरण में बड़े स्टेक होल्डर्स के 10 तुलाई कांटों (वे-ब्रिज) को पूरी तरह ऑटोमेटेड कर दिया है। इसके साथ ही खनिज परिवहन में लगे 430 वाहनों में रियल टाइम ट्रैकिंग के लिए जीपीएस सिस्टम इंस्टॉल किए जा चुके हैं। अधीक्षण खनिज अभियंता ओपी काबरा ने बताया कि यह प्रोजेक्ट केंद्र के पीएम उन्नति का हिस्सा है और राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। यह व्यवस्था एक अप्रेल से लागू होने के साथ ही अवैध खनन पर अंकुश लगेगा।

मार्च अंत तक 35 कांटों का लक्ष्य

काबरा ने बताया कि काम युद्धस्तर पर चल रहा है। लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, बिजौलिया, निम्बाहेड़ा में 35 से अधिक तुलाई यंत्रों को ऑनलाइन ऑटोमेशन से जोड़ दिया जाएगा। इससे न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि मैनुअल छेड़छाड़ की गुंजाइश भी खत्म होगी। वही अब तक 430 वाहनों को जीपीएस सिस्टम से जोड़ दिया गया है।

राजस्व छीजत पर लगेगी लगाम

खनिजों के वजन में होने वाली हेराफेरी रुकेगी, जिससे सरकार की आय बढ़ेगी। वाहनों की ट्रैकिंग से तय होगा कि खनिज लीगल लीज एरिया से ही ले जाया जा रहा है या अन्य किसी स्थान से मिनरल उठाया गया है। खनिज विभाग अब रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन के हाइब्रिड मोड का उपयोग कर रहा है। निर्बाध सेवा के लिए जीपीएस वेंडर्स और ओईएम का पंजीकरण किया जा रहा है।

काबरा ने बताया कि पहले चरण में हिंदुस्तान जिंक, जिन्दल सॉ लिमिटेड, उदयपुर मिनरल डवलपमेन्टस, डीडवानिया एंड सन्स, बजरी की चार लीजे कुल 9 तथा चित्तौड़गढ़ जिले की करीब 10 खदानों के कांटों पर हार्डवेयर इंस्टालेशन कर ऑनलाइन ऑटोमेशन से जोड़ा गया है। यानी भीलवाड़ा सर्कल में अब तक 19 खदानों को इस सिस्टम से जोड़ा गया है।