
Animal welfare classes in schools now
प्रदेश के सरकारी स्कूलों में परीक्षाओं का समय नजदीक आ रहा है, लेकिन शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को एक नई जिम्मेदारी सौंप दी है। अब शिक्षक स्कूलों में बच्चों को गणित-विज्ञान पढ़ाने के साथ-साथ पशुपालन और पशु कल्याण के गुर भी सिखाएंगे। निदेशालय ने आदेश जारी कर 14 जनवरी से 13 फरवरी 2026 तक पूरे राज्य में "पशुपालन एवं पशु कल्याण जागरुकता माह" मनाने के निर्देश दिए हैं। शिक्षा विभाग हाल ही में स्कूलों व आस-पास में आने वाले कुत्तों को भगाने के आदेश से चर्चा में हैं। अब पशुपालन को लेकर जारी किए आदेश ने शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है।
एक ओर जहां बोर्ड परीक्षाएं और वार्षिक परीक्षाएं नजदीक हैं, वहीं शिक्षकों के सामने अब इस जागरुकता अभियान को सफल बनाने की चुनौती है। शिक्षकों का तर्क है कि इस समय पूरा ध्यान सिलेबस पूरा करने और रिवीजन पर होना चाहिए, लेकिन विभाग ने उन्हें फोटोग्राफी, निबंध लेखन, वाद-विवाद प्रतियोगिता और नाटक मंचन जैसे आयोजनों में व्यस्त कर दिया है।
विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार स्कूलों में कई गतिविधियां होंगी। इनमें पशु कल्याण पर आधारित निबंध, वाद-विवाद और नाटक मंचन। विद्यार्थियों और पशुपालन विशेषज्ञों की 'इंटरैक्टिव क्लासरूम विजिट' करना। बच्चों को आधुनिक खेती और पशुओं की देखभाल की जानकारी देना। चरवाहों और दूरदराज के गांवों में जाकर पशुधन के प्रति जागरुकता फैलाना।
शिक्षकों का कहना है कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है, इसमें कोई दो राय नहीं है, लेकिन इसके लिए स्कूल के समय और शिक्षकों का उपयोग करना छात्रों की पढ़ाई को प्रभावित कर सकता है। शिक्षकों का एक बड़ा वर्ग इस बात से चिंतित है कि वे "परीक्षा की तैयारी कराएं या पशुओं को लेकर गांवों में जागरुकता फैलाएं। शिक्षा विभाग के अनुसार इस अभियान का उद्देश्य आधुनिक पशुपालन के तरीकों में सुधार करना, पशुधन के कल्याण को बढ़ावा देना और किसानों को उन्नत खेती के प्रति शिक्षित करना है। वही शिक्षक नेता इस अभियान का विरोध कर रहे हैं।
Published on:
16 Jan 2026 11:07 am
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