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वायरल में एंटीबायोटिक का ‘ओवरडोज’, मरीज नहीं हो रहे जल्दी ठीक

मौसम में बदलाव के साथ शहर में वायरल तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों के मेडिकल आउटडोर में मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की जा रही है। खासकर सर्दी-खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और हल्के बुखार से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चिंताजनक पहलू यह है […]

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Antibiotic overdose in viral infections; patients are not recovering quickly

Antibiotic overdose in viral infections; patients are not recovering quickly

  • समय के साथ खुद ठीक होता है वायरल
  • सपोर्टिव ट्रीटमेंट ही है कारगर विकल्प

मौसम में बदलाव के साथ शहर में वायरल तेजी से फैल रहा है। अस्पतालों के मेडिकल आउटडोर में मरीजों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की जा रही है। खासकर सर्दी-खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और हल्के बुखार से पीड़ित मरीज बड़ी संख्या में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। चिंताजनक पहलू यह है कि सात-सात दिन तक दवा लेने के बाद भी कई मरीज पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो पा रहे हैं। इसे लेकर राजस्थान पत्रिका की टीम ने महात्मा गांधी अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सकों से चर्चा की तो सामने आया कि वायरल संक्रमण के मामलों में भी एंटीबायोटिक दवाएं लिखी जा रही हैं। मरीजों को यह भ्रम है कि एंटीबायोटिक लेने से वे जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे, जबकि हकीकत इससे उलट है।

एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल संक्रमण में कारगर

अस्पताल अधीक्षक डॉ. अरुण कुमार गौड़ ने बताया कि एंटीबायोटिक दवाएं केवल बैक्टीरियल संक्रमण में कारगर होती हैं। मौसमी वायरल संक्रमण वायरस से होता है, ऐसे में एंटीबायोटिक का कोई प्रत्यक्ष लाभ नहीं होता। उल्टा, अनावश्यक सेवन से शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे मरीज को ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान वायरल सामान्यत: पांच से सात दिन में स्वत: ठीक हो जाता है। इसमें आराम, पर्याप्त पानी, हल्का भोजन और लक्षणों के अनुसार सीमित अवधि तक सपोर्टिव दवाएं पर्याप्त होती हैं। एंटी एलर्जिक, बी-कॉम्पलेक्स और विटामिन-सी की टेबलेट पांच दिन तक ली जा सकती है।

निजी अस्पतालों में बढ़ रहा आर्थिक बोझ

निजी अस्पतालों में एंटीबायोटिक और अन्य दवाएं लिखे जाने से मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। महंगी दवाओं और जांचों का खर्च सीधे मरीज की जेब पर असर डालता है। वहीं सरकारी अस्पतालों में दवा का खर्च सरकार वहन करती है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक भार शासन पर आता है। चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि बिना चिकित्सकीय परामर्श एंटीबायोटिक न लें। बार-बार उपयोग से भविष्य में दवाएं असर करना बंद कर सकती हैं, जिसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है। पत्रिका पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि जागरुकता की कमी और जल्द राहत की चाह में लोग भारी दवाओं की ओर झुक रहे हैं, जबकि वायरल संक्रमण में धैर्य, संतुलित आहार और उचित आराम ही सबसे प्रभावी उपचार है।