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भीलवाड़ा में आबोहवा बिगड़ी, शोर दोगुना

भीलवाड़ा में दीपावली पर शहर में जमकर आतिशबाजी हुई। धमाके इतने तेज थे कि मानक से दो गुना शोर बढ़ा। ध्वनि व वायु प्रदूषण बढ़ा है।
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भीलवाड़ा में आबोहवा बिगड़ी, शोर दोगुना

भीलवाड़ा में आबोहवा बिगड़ी, शोर दोगुना

भीलवाड़ा में दीपावली पर शहर में जमकर आतिशबाजी हुई। धमाके इतने तेज थे कि मानक से दो गुना शोर बढ़ा। ध्वनि व वायु प्रदूषण बढ़ा है। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट में गत साल के मुकाबले इस बार ध्वनि व वायु प्रदूषण दोनों में इजाफा हुआ। ध्वनि प्रदूषण सामान्य से लगभग दो गुना रहा। साइलेंस जोन चिकित्सालय क्षेत्र में आतिशबाजी पर प्रतिबंध के बाद भी यहां नियम की अनदेखी हुई। मरीज परेशान रहे। यहां रात 9 से 10 बजे के बीच अधिकतम ध्वनि प्रदूषण रहा।


आतिशबाजी में आजाद नगर अव्वल

सबसे अधिक आतिशबाजी आजाद नगर में हुई। यहां सामान्य 55 डेसीबल के मुकाबले शोर डेढ़ गुना दर्ज हुआ। आवासीय जोन साउंड लेवल न्यूनतम 45 और अधिकतम 55 डेसीबल होना चाहिए। गत साल अधिकतम शोर 79.80 एल ईक्यूवीलेंट डीबी (ए) डेसीबल था। इस बार रात 10 से 11 बजे के बीच 82.7 एल ईक्यूवीलेंट डीबी (ए) डेसीबल रहा। मंडल ने दीपावली से पहले और दीपावली के दिन ध्वनि प्रदूषण की मात्रा मापी। शाम 6 से रात 12 बजे तक ध्वनि प्रदूषण की मॉनिटरिंग हुई। आवासीय क्षेत्र की मॉनिटरिंग आजाद नगर सी सेक्टर तथा व्यावसायिक क्षेत्र की मॉनिटरिंग कुंभा सर्किल में रात 9 से 10 बजे 88.6 एवं रात 10 से 11 बजे के बीच 89.9 एल ईक्यूवीलेंट डीबी (ए) डेसीबल रहा।

55 डेसीबल से अधिक स्तर घातक
आवासीय जोन में साउंड लेवल न्यूनतम 45 डेसीबल और अधिकतम 55 होना चाहिए। साइलेंट जोन (हॉस्पिटल) में साउंड लेवल न्यूनतम 40 और अधिकतम 50 डेसीबल से ज्यादा नहीं होना चाहिए। जबकि यहां सबसे अधिक 85.6 एल ईक्यूवीलेंट डीबी (ए) डेसीबल रहा। पहली बार वायु प्रदूषण की भी तीन स्थानों पर जांच हुई। नगर परिषद के क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ा है। यहां दीपावली से पहले 164 था और बढ़कर 233 तक पहुंचा।