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भीलवाड़ा में ‘मक्का’ भरपूर, पर एथेनॉल प्लांट की दरकार; एमपी ले जा रहा मलाई

- पड़ोसी राज्यों में लगे प्लांट, यहां नहीं मिली जमीन व अनुदान; प्लांट लगे तो बढ़ें मक्का के दाम

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Bhilwara has plenty of maize, but needs an ethanol plant; MP is taking the cream

Bhilwara has plenty of maize, but needs an ethanol plant; MP is taking the cream

मक्का उत्पादन को लेकर जिले के कृषि व्यापार से जुड़ी एक बड़ी टीस उभरकर सामने आई है। जिले की 'अ' श्रेणी की सबसे बड़ी मंडी मक्का की आवक से तो लबालब है, लेकिन यहां मक्का प्रोसेसिंग और एथेनॉल प्लांट का अभाव किसानों और व्यापारियों दोनों को भारी पड़ रहा है। हालात यह हैं कि भीलवाड़ा का मक्का पंजाब, हरियाणा, गुजरात और मध्य प्रदेश जा रहा है, जबकि यहां प्लांट लगने की राह में सरकारी प्रोत्साहन और जमीन की कमी बड़ी बाधा बनी हुई है।

किसानों को होगा 500 रुपए प्रति क्विंटल का सीधा फायदा

मंडी व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में भीलवाड़ा में मक्का प्रोसेसिंग प्लांट नहीं होने से मक्का बाहर भेजना पड़ता है। इस पर 200 से 300 रुपए प्रति क्विंटल का अतिरिक्त परिवहन खर्च आता है। यदि एथेनॉल प्लांट भीलवाड़ा में लगे, तो किसानों को मक्का के दाम में 400 से 500 रुपए तक की बढ़ोतरी मिल सकती है। साथ ही,एथेनॉल तेल की कीमतों में भी कमी आएगी, जो अभी बाहर से मंगवाना पड़ता है।

एमपी मार रहा बाजी, भीलवाड़ा की मक्का नीमच में चमक

व्यापारियों का कहना है कि पिछले चार वर्षों में केंद्र और राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त मदद नहीं मिलने के कारण एथेनॉल प्लांट राजस्थान के बजाय मध्य प्रदेश के नीमच जैसे क्षेत्रों में लग गए। यदि यहां 3-4 प्लांट लग जाएं, तो हजारों युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा। भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद के किसानों के लिए भीलवाड़ा मक्का प्रोसेसिंग का हब बन सकता है।

मंडी व्यापारियों की सरकार से 3 प्रमुख मांग

  • - जमीन की उपलब्धता: एथेनॉल प्लांट के लिए सरकार रियायती दरों पर उपयुक्त जमीन आवंटित करे।
  • - विशेष अनुदान: कृषि आधारित उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पूंजीगत सब्सिडी दी जाए।
  • - सिंगल विंडो क्लीयरेंस: सरकारी औपचारिकताओं को कम कर निवेशकों को प्रोत्साहित किया जाए।
  • - व्यापारियों का तर्क: "हमारा मक्का विदेशों तक जा रहा है, लेकिन उद्योग हमारे पास नहीं है। सरकार केवल जमीन और अनुदान का हाथ बढ़ा दे, तो भीलवाड़ा की तस्वीर बदल सकती है।

मध्य प्रदेश ने नीतियां आसान बनाईं, हम पीछे रह गए

पिछले चार वर्षों में एथेनॉल की भारी मांग रही है। राजस्थान सरकार की ओर से जमीन और अनुदान में देरी के कारण निवेशकों ने पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के नीमच और अन्य क्षेत्रों का रुख कर लिया। अगर हमें रियायती जमीन मिले तो भीलवाड़ा मक्का प्रोसेसिंग का 'हब' बन सकता है।"

-प्रमोद काबरा, अनाज व्यापारी

किसानों की आय दोगुनी करने का यही रास्ता

भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ का हाइब्रिड मक्का बेहतरीन है। यहां प्लांट लगे तो किसानों को फसल के दाम 500 रुपए ज्यादा मिलेंगे और युवाओं को रोजगार के लिए बाहर नहीं भटकना पड़ेगा। एथेनॉल यहीं बनेगा तो इसकी लागत भी कम होगी।

- मनोज कचोलिया, मंडी व्यापारी

परिवहन का खर्च बचेगा तो मंडी का व्यापार बढ़ेगा

हमारा मक्का विदेशों तक जा रहा है, लेकिन प्रोसेसिंग बाहर होने से मुनाफा दूसरे ले जा रहे हैं। सरकार को सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए एग्रो-इंडस्ट्री को बढ़ावा देना चाहिए ताकि मंडी में व्यापार और राजस्व दोनों में वृद्धि हो।

- दीपक डागा, मंडी व्यापारी