
Brick kilns will not be able to operate in Rajasthan after June 30
Bhilwara news : राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरपीसीबी) ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने आदेश जारी किया है कि राज्य में ईंट भट्टों का संचालन अब साल में सिर्फ छह माह तक होगा सकेगा। संचालन अवधि 1 जनवरी से 30 जून तक होगी। पहले ईंट भट्टों का संचालन नौ माह होता था। प्रदेश में पांच हजार से अधिक ईंट भट्टे हैं। इन भट्टों में उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश तथा बिहार समेत अन्य राज्यों से हजारों श्रमिक काम करने आते है। नए नियम से श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। साथ ही ईंटों की कीमतों में भी इजाफा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
एनजीटी के निर्देशों पर जारी किए आदेश
यह फैसला राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों पर लिया गया है। एनजीटी ने 24 जनवरी 2024 को बड़े समूहों में चल रहे ईंट भट्टों को नियंत्रित करने का आदेश दिया था। इसके बाद ईंट भट्टा संघों ने खुद प्रदूषण नियंत्रण के लिए फायरिंग अवधि सीमित करने का प्रस्ताव रखा। 22 जनवरी 2025 को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक कार्यशाला भी की। इसमें क्षेत्रीय अधिकारी और ईंट भट्टा संघों के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी की सहमति से छह महीने की समय सीमा तय की गई। यह आदेश भीलवाड़ा समेत प्रदेश के हर जिले में लागू होगा। हालांकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और उससे सटे इलाकों में पहले से ही कड़े नियम हैं। इसलिए वहां इस आदेश का कोई असर नहीं होगा। जुलाई से दिसंबर तक भट्टों की फायरिंग पूरी तरह बंद रहेगी।
बढ़ सकते हैं ईंटों के दाम
भीलवाड़ा जिला चिमनी ईंट उद्योग संघ भीलवाड़ा के अध्यक्ष संजय कुमावत का कहना है कि भट्टों के संचालन पर प्रतिबंध से राज्य में निर्माण कार्यों पर असर पड़ेगा। निर्माण कार्यों में ईंटों की मांग पूरे साल बनी रहती है, लेकिन जब उत्पादन छह महीने तक सीमित रहेगा, तो मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे ईंटों की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना है। यदि उत्पादन घटता है, तो ईंटों की दरें बढ़ सकती हैं। पहले भी जब चार माह तक ईंट भट्टे बंद होते है तो तब ईंटों की कीमतों में 20-30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
हजारों श्रमिकों पर संकट
राजस्थान के ईंट भट्टों में लाखों की संख्या में मजदूर काम करते हैं। इनमें से अधिकतर प्रवासी और दिहाड़ी मजदूर होते हैं, जो पूरे साल ईंट भट्टों पर निर्भर रहते हैं। अब संचालन अवधि कम करने से इन मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। सामान्यत: ईंट भट्टों में 8 से 9 महीने तक काम होता है। बारिश के दौरान मजदूर अपने घर लौटते जो दीपावली के बाद ही वापस आते है। लेकिन अब यह समय घटकर मात्र छह महीने रह जाएगा।
आदेशों की पालना न करने पर होगी कार्रवाई
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के आदेशों की पालना न होने पर ईट भट्टा संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ईट भट्टे 1 जनवरी से 30 जून तक ही चल सकेंगे।
- दीपक धनेटवाल, क्षेत्रीय अधिकारी, आरपीसीबी
Published on:
07 Mar 2025 11:26 am

