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Bhilwara news : केमिकलयुक्त रंग डाल सकते होली पर्व पर भंग

- रंगों के बारे में जान लें, नहीं तो हो सकते हानिकारक

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Chemical colours can spoil the Holi festival

Chemical colours can spoil the Holi festival

Bhilwara news : उल्लास और उमंग का पर्व होली में एक दिन बचा है। होलिका दहन गुरुवार को धूलंडी शुक्रवार को मनाई जाएगी। रंगोत्सव के पर्व को देखते हुए बाजार में रंग-गुलाल खरीदारी बढ़ी है। बाजार में बिकने आए कई रंगों में हानिकारक केमिकल्स मिलाए जाते हैं। इसलिए होली के रंगीन पर्व का मजा लेने से पहले रंगों के बारे में सावधानी बरतनी जरूरी है। यह हमारी त्वचा व आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं। खासकर, कई लोग पक्के रंग खरीदते हैं, ताकि उनका रंग चेहरे पर लंबे समय तक रहे। लेकिन इन रंगों में मौजूद केमिकल्स स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंगों में मिलने वाले केमिकल्स में काले रंग में लेड ऑक्साइड, हरे रंग में कॉपर सल्फेट, सिल्वर रंग में एल्यूमिनियम ब्रोमाइड, नीले रंग में प्रशियन ब्लू, लाल रंग में मस्करी सल्फाइड जैसे केमिकल्स मौजूद होते हैं। यदि रंगों से तेज और अजीब तरह की गंध आती हो, तो वो हानिकारक रसायनों के संकेत हो सकते हैं। ऐसे रंगों से बचने की जरूरत है।

कैसे करें हानिकारक रंगों से बचाव

त्वचा को सुरक्षा देने के लिए सनस्क्रीन और मॉइश्चराइजर का उपयोग करें। होली खेलने के बाद रंगों को हल्के क्लेंजर से अच्छे से धोकर त्वचा को पोषण देने वाले उत्पादों का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, सुरक्षा के लिए दस्ताने पहनना और लंबे कपड़े पहनना भी मददगार साबित हो सकता है।

रंग खरीदते समय सही रंगों का चुनाव करें

होली के दौरान रंगों का चुनाव करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो रंग खरीद रहे हैं, वे सुरक्षित और प्राकृतिक हों। सही रंग का चुनाव पैकेट पर लिखी सामग्री के अलावा भी कई तरीके से किया जा सकता है। प्राकृतिक और आर्गेनिक रंगों का इस्तेमाल करें, क्योंकि ये हानिकारक रसायनों से मुक्त होते हैं और त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाते। हर्बल रंग, जैसे गेंदा, हल्दी, चंदन, गुलाब, आदि से बने रंगों का चयन करें। माधव गोशाला संचालक इस बाहर हर्बल गुलाल तैयार कर रहे है। इसका उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा बाजार में भी हर्बल गुलाल कई तरह की उपलब्ध है।

ड्राईकलर और गुलाल सुरक्षित

खेलने के लिए ड्राईकलर और गुलाल सुरक्षित है। सिंथेटिक कलर में रेत मिक्स होती है। इसका प्रयोग बिल्कुल ना करें। वाटर कलर में रिएक्शन का खतरा ज्यादा होता है। रंग खेलने के बाद धूप में जाने से बचें। धूप की वजह से त्वचा बर्न और डार्क होती है। जलन, खुजली व लालीपन आ जाता है। घर पर इसका इलाज करने से बचें। तत्काल चिकित्सक से सम्पर्क करें।

- डॉ.भागीरथ सिंह, चर्म रोग विशेषज्ञ, एमजीएच