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Bhilwara news : एमएसएमई बिल: पांच दिन में नहीं मिला भुगतान तो अटक जाएंगे करोड़ों

31 मार्च तक नहीं किया भुगतान तो इनकम में जुड़ेगा बकाया

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MSME bill: If payment is not received in five days, crores will be stuck

MSME bill: If payment is not received in five days, crores will be stuck

Bhilwara news : भीलवाड़ा आयकर विभाग की धारा 43(बी) (एच) के नए नियम की वजह से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) से सामान लेकर बेचने वाले व्यापारियों की मुश्किल बढ़ सकती है। एमएसएमई के सामान के बिल का 45 दिन में भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस वित्तीय वर्ष में शेष रहे पांच दिन में भुगतान नहीं किया गया तो यह पूरी बकाया राशि व्यापारी के इनकम में जुड़ जाएगी। इस पूरी बकाया राशि को लाभ में मानते हुए व्यापारी को इनकम टैक्स जमा करवाना होगा। यह बकाया राशि चुकाने पर अगले वित्तीय साल में ही यह टैक्स की राशि व्यापारी को दुबारा मिल पाएगी।

एमएसएमई उद्योगों से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने 45 दिन में भुगतान का नियम तो बना दिया, लेकिन कोई भी इसकी पालना नहीं कर रहे है। इससे छोटे व्यापारियों को भी भुगतान को लेकर आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। एक उद्यमी ने बताया कि भारत देश के साथ राजस्थान व भीलवाड़ा के कई एमएसएमई उद्योग के भुगतान बकाया चल रहा है। यह राशि पांच दिन के भीतर उनके बैंक खाते में जमा नहीं करवाते है तो उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। एक अप्रेल 2025 से बकाया राशि पर इनकम मानते हुए टैक्स वसूल किया जाएगा। जब तक हर व्यापारी के करोड़ों रुपए इनकम टैक्स में जमा रहने से व्यापार से ब्लॉक हो जाएंगे। उद्योगपति व व्यापारी के इन एमएसएमई उद्योगों को करोड़ों की देनदारी है।

यदि 31 मार्च 2025 तक रकम का भुगतान नहीं होता है तो यह सारी देनदारी धारा देनदार की इनकम में जोड़ दी जाएगी। इस पर आयकर के नियमानुसार 30 से 33 प्रतिशत टैक्स देना पड़ेगा। इससे इन एमएसएमई से सामान लेने वाले व्यापारी व उद्योगपतियों को बहुत बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

50 करोड़ का है टर्न ओवर, तो इस कैटेगरी में होंगे शामिल

सीए सोनेश काबरा ने बताया कि एमएसएमई उद्योग को यदि तय सीमा से पहले भुगतान नहीं किया, तो आपने जो भी खर्चा अपने प्रॉफिट-लॉस अकाउंट के अंदर क्लेम किया है, वही आपकी इनकम मान ली जाएगी। एमएसएमई मंत्रालय के अनुसार जिसका प्लांटेशन मशीनरी में 10 करोड़ तक निवेश है। साथ में पिछले फाइनेंशियल ईयर में टर्न ओवर 50 करोड़ का है, वे स्मॉल उद्यम के कैटेगरी में आएंगे।