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Bhilwara news : पीएम कुसुम योजना में अधिकारी व जनप्रतिनिधि बने औद्योगिक विकास में रोड़ा

- सीएम दौरे से पहले वायरल पत्र ने मचाया हड़कंप - एक पखवाड़े पहले आरटीएमए ने लिखा था सीएम को पत्र - राइजिंग राजस्थान के तहत किए एमओयू पड़ सकते खटाई में

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Officers and public representatives in PM Kusum Yojana became a hindrance in industrial development

Officers and public representatives in PM Kusum Yojana became a hindrance in industrial development

Bhilwara news : भीलवाड़ा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दौरे से ठीक एक दिन पहले राजस्थान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (आरटीएमए) की ओर से एक पखवाड़े पूर्व सीएम को लिखे पत्र के गुरुवार को वायरल होते ही हड़कम्पमच गया। पत्र में पीएम कुसुम योजना में अफसरों और जनप्रतिनिधियों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए उद्यमियों ने अपनी पीड़ा उजागर की। एक तरफ राजस्थान सरकार राजस्थान दिवस समारोह के तहत 31 मार्च को निवेश उत्सव मनाने जा रही है। समारोह में निवेश करने वाले उन उद्यमियों का सम्मान करेगी जिन्होंने एमओयू के बाद अपने उद्योग का काम शुरू कर दिया है। दूसरी ओर भीलवाड़ा के उद्यमियों की पीड़ा ने राजस्थान इंवेस्टमेंट समिट पर सवाल खड़े कर दिए है। उद्यमियों को केंद्र सरकार की पीएम कुसुम योजना का लाभ अधिकारियोें के कारण नहीं मिल रहा है। इसे लेकर उद्यमियों का गुस्सा खुलकर सामने आ रहा है।

बिजलीें की दरें अधिक, पलायन हो रहा

आरटीएमए की ओर से लिखे पत्र में कहा गया कि टेक्सटाइल उद्योग के लिए सबसे प्रमुख चिंताओं में से एक बिजली की सबसे अधिक दरों को लेकर है। अन्य राज्यों के मुकाबले राजस्थान में सबसे अधिक बिजली की दरे होने से लागत मूल्य में भी वृद्धि हो रही है। इसके चलते भीलवाड़ा के कई उद्योगों ने अपना विस्तार पर रोक लगाते हुए मध्यप्रदेश की ओर पलायन कर दिया है। जबकि भीलवाड़ा टेक्सटाइल उद्योग की देश में ही नहीं विदेश में भी अलग पहचान है।

योजना अच्छी, अपने ही अवरोध बनें

केंद्र व राज्य सरकार की पीएम कुसुम योजना उद्योगों व किसानों के लिए अच्छी है। उद्यमी भी अपने विस्तारीकरण के साथ सोलर प्लांट लगा रहे है। लेकिन अधिकारी व जनप्रतिनिधि की ओर से अवरोध खड़ा करने से सोलर प्लांट से बिजली उद्योगों को नहीं मिल रही। जबकि राजस्थान सरकार ने बिजली की लाइन डालने के लिए किसानों को डीएलसी दर का 200 प्रतिशत व कोरिडोर एरिया बनाने पर डीएलसी दर का 30 प्रतिशत अधिक मुआवजा देने का प्रावधान किया है। इसके लिए उद्यमी व किसान भी तैयार है, लेकिन जनप्रतिनिधि किसानों को न तो मुआवजा लेने देते है और ना अधिकारी इस काम को गति देते है।

200 प्रतिशत सोलर क्षमता योजना का लाभ नहीं

मुख्यमंत्री ने बजट चर्चा का जवाब देते हुए 29 जुलाई को ऊर्जा उत्पादन के लिए केप्टिव पावर उत्पादन की सीमा 100 से बढ़ाकर 200 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। इसका लाभ उद्योगों को अधिकारियों की कार्यशैली व जनप्रतिनिधियों के दखल से नहीं मिल रहा। राइजिंग राजस्थान के तहत किए एमओयू भी खटाई में पड़ रहे है। दखल को नहीं रोका तो उद्योगों को चलाना मुश्किल होगा।

- एसएन मोदानी, चेयरमैन आरटीएमए