
Tariff War: Bhilwara can make a mark in readymade garments
Bhilwara news : अमरीका की ओर से लगाए टैरिफ के बाद पूरे विश्व में हलचल मची है। टैरिफ वार से भीलवाड़ा की टेक्सटाइल उद्योग को फायदा मिल सकता है। वर्तमान में चीन, वियतनाम व बांग्लादेश रेडिमेड गारमेंट के बड़े उत्पादक देश है। इन देशों पर भारत से अधिक टैरिफ लगाने से टेक्सटाइल पर असर पड़ेगा। इस मौके को भूनाकर विश्व में टेक्सटाइल सिटी के नाम से विख्यात भीलवाड़ा रेडीमेड गारमेंट में नाम कमा सकता है। यहां डेनिम व कॉटन शूटिंग का अच्छा उत्पादन है।
सरकार भी कर रही मदद
उद्योगपति को रेडीमेड गारमेंट के क्षेत्र में काम बढ़ाने के लिए सरकार भी सहायता उपलब्ध करवा रही है। भीलवाड़ा में रेडीमेड गारमेंट्स इंडस्ट्री विकसित हो सकती है। सरकार ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए एक जिला एक उत्पाद में टेक्सटाइल व रेडीमेड गारमेंट्स का चयन किया है। इसके लिए सरकार उद्योग लगाने के लिए सब्सिडी देगी। इसमें अधिकतम 1 करोड़ रुपए निवेश वाले माइक्रो उद्योगों के लिए प्रोजेक्ट कोस्ट पर 25 प्रतिशत मार्जिन मनी का प्रावधान किया है।
रेडीमेड गारमेंट्स इंडस्ट्री में मिलेगा फायदा
टेक्सटाइल क्षेत्र में अत्याधुनिक मशीनों के साथ स्पिनिंग, विविंग या प्रोसेसिंग यूनिट 10 करोड़ रुपए के निवेश से लगाना मुश्किल है। स्टेचिंग मशीनों की कीमत 50 हजार से 6 लाख तक है। रेडिमेड गारमेंट उद्योग का वर्तमान में 50 करोड़ का मासिक टर्नओवर है। रेडीमेड गारमेंट्स क्लस्टर बनने से यह कारोबार 200 करोड़ प्रति माह हो सकता है। भीलवाड़ा में सभी तरह के रेडिमेड गारमेंट्स बनाए जा रहे है। इनमें स्कूल यूनिफॉर्म, कॉटन पेंट, फॉर्मल ड्रेस, टाउजर, मेडिकल यूनिफॉर्म व जिंस प्रमुख है। इस उद्योग में करीब 6000 कारीगर कार्यरत हैं। इनमें 2000 महिलाएं भी शामिल है।
अमरिका का बढ़ सकता बाजार
उद्यमी चाहे तो रेडिमेड गारमेंट के क्षेत्र में कदम बढ़ाने के साथ काम शुरू कर सकते है। इसका फायदा यह होगा की अमरीका ने अभी भारत 26, चीन 34, थाईलैंड 36, बांग्लादेश 37 व वियतनाम पर 46 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है। भारत पर कम टैरिफ होने का फायदा मिल सकता है। डेनिम व कॉटन टाऊजर का एक्सपोर्ट बढ़ सकता है।
भीलवाड़ा में बने रेडीमेड गारमेंट्स के लिए मल्टी स्टोरी
भीलवाडा़ में रेडीमेड गारमेंट्स क्लस्टर बनाने की मांग केंद्र व राज्य सरकार से लंबे समय से करते आ रहा रहे है। यहां मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाई जानी चाहिए। क्योंकि रेडीमेड गारमेंट्स यूनिट में जमीन व बिल्डिंग का बड़ा खर्चा होता है। यह उद्यमी नहीं उठा सकते है। ऐसे में यहा क्लस्टर विकसित किया जाना चाहिए। मल्टी स्टोरी होगी तो उद्यमी अपनी मशीन लगाकर उद्योग शुरू कर सकता है। टैरिफ वार का रेडीमेड गॅारमेंटस में भीलवाड़ा फायदा ले सकता है।
- आरके जैन, महासचिव मेवाड़चैम्बर ऑफ कामर्स
Published on:
06 Apr 2025 09:21 am
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