
भीलवाड़ा के छात्रों की डिफेंस तकनीक में उड़ान, स्टार्टअप को केंद्र सरकार से मिला 1.83 लाख का अनुदान
माणिक्य लाल वर्मा (एमएलवी) टेक्निकल कॉलेज के छात्रों ने नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कामयाबी हासिल की है। कॉलेज के तृतीय वर्ष आईटी और कंप्यूटर साइंस के पांच छात्रों के रक्षा तकनीक पर आधारित स्टार्टअप प्रोजेक्ट को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से मान्यता मिली है। इस प्रोजेक्ट को संगम यूनिवर्सिटी स्थित संगम आई-टीबीआई इंक्यूबेटर में इंक्यूबेशन के लिए चुना गया है।
छात्रों की इस नवोन्मेषी सोच और प्रोजेक्ट की अपार संभावनाओं पर विश्वास जताते हुए, इसे 1 प्रतिशत इक्विटी के बदले 1.83 लाख रुपए का अनुदान प्रदान किया गया है। यह राशि प्रोजेक्ट को एक सफल स्टार्टअप के रूप में विकसित करने में शुरुआती उड़ान देगी।
इस टीम में अनिमेष पांडे, अंशुल खींची, आशीष शर्मा, हर्षित छीपा और किशोरी अरोरा शामिल हैं। इन छात्रों ने अपनी तकनीकी कुशलता का परिचय देते हुए रक्षा क्षेत्र में काम आने वाली तकनीक, विशेष रूप से उन्नत सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक्स आधारित समाधान विकसित किया है। संगम विश्वविद्यालय में इंक्यूबेशन के तहत अब इस प्रोजेक्ट को आगे के लिए जरूरी तकनीकी और व्यावसायिक सहयोग मिलेगा। इससे यह भविष्य में एक बड़े'स्केलेबलस्टार्टअप' का रूप ले सकेगा। टीम के सदस्यों ने अपनी इस सफलता का श्रेय सूचना एवं प्रसारण विभाग के विभागाध्यक्ष अनुराग जागेटिया, यांत्रिकी विभाग के फैकल्टी सूरज गुप्ता और तकनीशियन पवन टेलर के कुशल मार्गदर्शन को दिया है।
छात्रों की यह सफलता न केवल हमारे संस्थान के लिए बड़े गर्व का विषय है, बल्कि कॉलेज के अन्य सभी विद्यार्थियों के लिए भी बेहद प्रेरणादायक है। इससे युवाओं में नवाचार और स्टार्टअप की दिशा में आगे बढ़ने का उत्साह जगेगा।
- डॉ. अरविंद वशिष्ठ, प्राचार्य, एमएलवी टेक्निकल कॉलेज, भीलवाड़ा
भीलवाड़ा. सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को इस बार गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों में खून की कमी को दूर कर एनीमिया मुक्त राजस्थान बनाने के लिए नई जिम्मेदारी सौंपी है। अब शिक्षक छुट्टियों के दौरान बच्चों को आयरन फोलिक एसिड की गोलियां बांटेंगे।
नौनिहालों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उम्र और कक्षा के हिसाब से गोलियों का निर्धारण किया है। इसमें गुलाबी गोली कक्षा 1 से 5वीं तक के छोटे बच्चों को दी जाएगी। पीली गोली कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों को वितरित की जाएगी। शिक्षकों का काम केवल बच्चों तक दवा पहुँचाने तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन्हें इसका पूरा रेकॉर्ड भी मेंटेन करना होगा। शिक्षकों को बांटी गई गोलियों का सारा हिसाब-किताब अनिवार्य रूप से शाला दर्पण पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज करना होगा।
आमतौर पर ग्रीष्मावकाश का समय शिक्षकों के लिए राहत भरा होता है, लेकिन भीषण गर्मी के बीच घर-घर या मोहल्लों में जाकर बच्चों को दवाइयां बाँटने और फिर ऑनलाइन पोर्टल पर डेटा फीडिंग के इस नए काम ने शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग इसे बच्चों के बेहतर भविष्य और स्वास्थ्य के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण कदम मान रहा है। उधर, राजस्थान शिक्षक संघ (प्रगतिशील) के प्रदेशाध्यक्ष नीरज शर्मा ने सरकार के इस आदेश का विरोध किया है। शर्मा का कहना है कि शिक्षक गर्मियों की छुटि्ेटयों में कहीं धुमने का कार्यक्रम बना चुके है। ऐसे में इस आदेश से परिवार में कलह होगा।
Published on:
14 Apr 2026 09:13 am
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