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भीलवाड़ा: बुराई पर अच्छाई की जीत, हर्षोल्लास के साथ जली होली

वस्त्रनगरी में सोमवार को रंगों का उत्सव होली पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। जिले भर में अलग-अलग शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया, जहां अधर्म पर धर्म की विजय के जयकारे गूंज उठे। शाम ढलते ही शहर के गली-मोहल्लों में उत्सव का माहौल छा गया। महिलाओं ने सुख-समृद्धि की कामना […]

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Bhilwara: Victory of good over evil, Holi celebrated with great joy

Bhilwara: Victory of good over evil, Holi celebrated with great joy

  • गली-मोहल्लों में गूंजी चंग की थाप, ढोल-नगाड़ों संग पूजन करने पहुंचे नवविवाहित जोड़े

वस्त्रनगरी में सोमवार को रंगों का उत्सव होली पर्व पारंपरिक श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। जिले भर में अलग-अलग शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया, जहां अधर्म पर धर्म की विजय के जयकारे गूंज उठे। शाम ढलते ही शहर के गली-मोहल्लों में उत्सव का माहौल छा गया। महिलाओं ने सुख-समृद्धि की कामना के साथ विधिवत पूजा-अर्चना की, वहीं ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते-गाते नवविवाहित जोड़ों ने पहली होली की पूजा कर आशीर्वाद लिया।

फूलों और गुब्बारों से सजी होलिका, उमड़ी भारी भीड़

शहर के वकील कॉलोनी, सरकारी दरवाजा, गांधीनगर, सिरकी मोहल्ला, आजाद चौक, वीर सावरकर चौक और आरसी व्यास कॉलोनी सहित तमाम क्षेत्रों में लकड़ियों और कंडों से भव्य होली सजाई गई। कई स्थानों पर आकर्षक फूलमालाओं और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजावट की गई। शाम से ही पूजन का सिलसिला शुरू हुआ जो रात पौने आठ बजे तक चला। अग्रवाल उत्सव भवन में समाज की प्राचीन परंपरा के अनुसार कंडों की होली जलाई गई और उत्साह के साथ धमाल कार्यक्रम आयोजित किया गया।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश: कई जगह हुआ वैदिक दहन

परंपरा के साथ-साथ इस बार आधुनिक सोच और पर्यावरण प्रेम भी देखने को मिला। पंडित अशोक व्यास ने बताया कि शहर में कई स्थानों पर लकड़ी की जगह कंडों का उपयोग कर वैदिक होलिका दहन किया गया।होलिका दहन के बाद लोगों ने गेहूं की बालियां सेंकी। मान्यता है कि नया धान घर ले जाने से सुख-समृद्धि आती है। स्थानीय निवासी पंकज जैन ने बताया कि सुबह से ही तैयारियों का दौर जारी रहा और रात 9 बजे विधिवत दहन किया गया।

धुलंडी पर चंद्रग्रहण का साया, पर फीका नहीं होगा रंगोत्सव

मंगलवार 3 मार्च को शहर में धुलंडी का पर्व मनाया जाएगा। हालांकि इस दिन चंद्रग्रहण रहेगा, लेकिन ज्योतिषियों के अनुसार इसका असर धुलंडी के उत्साह पर नहीं पड़ेगा। सूतक काल सुबह 09:45 बजे से प्रारम्भ होगा। चंद्रग्रहण काल का समय शाम 06:45 से 06:47 बजे तक 2 मिनट रहेगा। मंदिरों के पट सूतक के कारण पट बंद रहेंगे। शाम को शुद्धि के बाद खुलेंगे। पंडितों का मत: ग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए सूतक के नियमों का पालन किया जाएगा। शाम को मंदिरों की सफाई और शुद्धिकरण के बाद ही दर्शन सुलभ होंगे।