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भूरा बाबा के मेले में उमड़े श्रद्धालु, दिखी राजस्थानी संस्कृति की झलक

तहसील क्षेत्र के ग्रामीण अंचल का प्रसिद्ध भूरा बाबा का मेला रविवार को आगूंचा कस्बे में धूमधाम से आयोजित 

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हुरड़़ा क्षेत्र के आगूंचा में भूरा बाबा के मेले में बिंदोली निकालते ग्रामीण


हुरड़ा।
तहसील क्षेत्र के ग्रामीण अंचल का प्रसिद्ध भूरा बाबा का मेला रविवार को आगूंचा कस्बे में धूमधाम से आयोजित किया जा रहा है। हर साल आसोज माह की पंचमी तिथि को आयोजित होने वाले इस मेले में तहसील क्षेत्र के सुदूर छोटे-छोटे गांवों एवं कस्बों से हजारों की संख्या में लोग पहुंच रहे हैं।

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राजस्थानी परिधान में सजी धजी हिलाओं के द्वारा मेले में घरेलू सामग्रियों की जमकर खरीददारी की। निकटवर्ती बड़ला, रूपाहेली बराठिया, कोठियां, हुरड़ा, कोटडी, भोजरास, इंदिरा खेड़ा, भगवानपुरा, परसरामपुरा, चेनपुरिया, अमरतिया, रामपुरा, भैरूखेड़ा गांव के लोग मेले में शिरकत करने पहुंच रहे हैं। मेले में बैंडबाजों के साथ भूरा बाबा की बिंदोली निकाली गई। इसमें लोग भजनों पर नाचते गाते चल रहे थे। गांव के विभिन्न मार्गों से निकली बिंदोली का जगह—जगह स्वागत किया गया। लोगों ने पूजा अर्चना कर भोग लगाया। बिंदोली गांव में घूमती हुई मेला स्थल पहुंची जहां बाबा का निशान चढाया गया।

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सिर कटने के बाद भी लड़ता रहा भूरा बाबा
आगूंचा कस्बे के मध्य में स्थित लोकदेवता धाम भूरा बाबा के नाम से स्थापित है। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार सैकड़ों वर्षो पूर्व अजमेर जिले के केकड़ी तहसील में स्थित कुवास गांव में सात पराक्रमी राजपूत भाइयों द्वारा शत्रुओं से लड़ते वक्त सातों भाइयों के सिर कट गए। इनमें से सबसे बड़ा भाई भूरसिंह सिर कटने के उपरांत भी धड़ के सहारे काफी समय तक लड़ता रहा। यही भूरसिंह आगे चल कर यहां स्थापित होकर भूरा बाबा के नाम से प्रसिद्ध स्थल के रूप में चमत्कारी बना। मेले के दौरान दोपहर में भूरा बाबा की बिंदोली भी पूरे गांव में निकाली जाती है साथ में अन्य लोक देवताओं के भी भाव इसमें शामिल रहते हैं।